तीन दिवसीय सेवा व आध्यात्म का अनुष्ठान संपन्न

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गीता पाठ, सत्संग और प्रवचनों से गुंजायमान हुआ धनीनाथ गिरी मठ, सेवावीरों का हुआ सम्मान

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बीकानेर, 16 मई। श्री शिव किशन दाधीच जमना देवी दाधीच स्मृति सेवा प्रन्यास, बीकानेर की ओर से आयुर्वेद व आध्यात्म सेवा के पर्याय रहे स्वर्गीय श्री शिवकिशन दाधीच की 10वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय सेवा व आध्यात्म अनुष्ठान का आयोजन किया गया। शनिवार को कोटगेट स्थित श्री धनीनाथ गिरी मठ (पंच मंदिर) के प्रांगण में ऋषिकेश से पधारे स्वामी श्री प्रयागदास जी महाराज के पावन सानिध्य में मुख्य अनुष्ठान एवं सत्संगी जन सम्मान समारोह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

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पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान विष्णु के दस अवतारों तथा माता सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन व पूजन के साथ हुआ। उपस्थित परिजनों, प्रबुद्धजनों और श्रद्धालुओं ने स्वर्गीय श्री शिवकिशन दाधीच के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात स्वामी श्री प्रयागदास जी महाराज के मुखारविंद से सस्वर गीता पाठ का वाचन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी भक्तों ने सामूहिक रूप से सुर मिलाया। सत्संग के दौरान राम धुन और कृष्ण धुन से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

सत्संग और जीव सेवा ही मोक्ष का मार्ग: स्वामी प्रयागदास
श्रद्धालुओं को ज्ञानगंगा से सराबोर करते हुए ऋषिकेश के स्वामी श्री प्रयागदास जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा सनातन धर्म में श्रीमद्भगवद्गीता मोक्षदायिनी है, जो मनुष्य को जीवन जीने की सही राह दिखाती है। सत्संग की महिमा बताते हुए कहा सत्संग वह रथ है जो जीव को इस सांसारिक भवसागर से पार उतारता है।

परमार्थ ही स्वर्ग का द्वार: गाय, ब्राह्मण और जीव मात्र की सेवा-सहयोग ही परमार्थ है। दाधीच परिवार द्वारा किया जा रहा यह सेवा कार्य अत्यंत पावन है। मनुष्य को अपनी श्रद्धा के अनुसार सेवा कार्यों में लीन रहना चाहिए, जिससे ईश्वर की असीम कृपा प्राप्त होती है।

‘नर सेवा ही नारायण सेवा’: चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का सम्मान
इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों का विशेष अभिनंदन किया गया।

डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि नवजातों व शिशुओं के उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना के साथ किया गया यह आयोजन समाज में ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की भावना को सुदृढ़ करेगा।

डॉ. कुलदीप सिंह बीठू एवं डॉ. मनोज माली ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चिकित्सा सेवा के माध्यम से हम जीवंत समाज का हिस्सा बनकर जनमानस को प्रेरित करने का कार्य करते हैं।

योगेन्द्र कुमार दाधीच (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय संस्कृति व सनातन सार्वभौम महासभा) ने कहा कि एक अबोध शिशु, जो अपनी पीड़ा बोलकर नहीं बता सकता, उसे स्वस्थ कर पूरे परिवार को खुशी देना सबसे बड़ा कल्याणकारी कार्य है। ऐसे सेवाभावी चिकित्सकों पर ईश्वर का विशेष आशीर्वाद रहता है।

गरिमामयी उपस्थिति एवं आभार
इस पावन प्रसंग पर वेदशास्त्री पंडित प्रकाश शर्मा, पुजारी शिवरतन सेवग, भवानी सेवग, चांद रतन सोनी, रामचन्द्र पंजाबी सहित प्रन्यास के प्रवीण दाधीच एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर इंजीनियर रजत दाधीच ने सभी आगंतुक संतों, अतिथियों और श्रद्धालुओं का हृदय से आभार प्रकट किया।

 

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