मंत्रालयिक कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर शिक्षा विभाग में हलचल, 1986 के कार्मिकों की पदोन्नति और 2017 से रिव्यू डीपीसी की उठी मांग
कमल नारायण आचार्य


- शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने सौंपे तीन ज्ञापन; ऑनलाइन काउंसलिंग से पदस्थापन और रिव्यू डीपीसी की मांग
बीकानेर, 18 मई। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री कमल नारायण आचार्य के नेतृत्व में आज मंत्रालयिक कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर एक साथ तीन महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपे गए। ये ज्ञापन राजस्थान के राज्यपाल माननीय हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री माननीय भजनलाल शर्मा, केन्द्रीय कानून मंत्री माननीय अर्जुन राम मेघवाल, और स्कूल शिक्षा मंत्री माननीय मदन दिलावर सहित मुख्य सचिव श्री वी-श्रीनिवास, शासन सचिव कार्मिक श्रीमती अर्चना सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) श्री राजेश कुमार यादव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक श्री सीताराम जाट और अतिरिक्त निदेशक श्री शैलेन्द्र देवड़ा सहित समस्त संयुक्त निदेशकों व जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए हैं।


पहले ज्ञापन में मांग की गई है कि सत्र 2025-26 के तहत संस्थापन अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी की निदेशालय, संभाग और जिला स्तर पर डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। संघ ने निवेदन किया है कि इन सभी मंत्रालयिक कर्मचारियों के पदस्थापन (पोस्टिंग) ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से ही करवाए जाएं, ताकि एक ही विभाग में पदोन्नति के बाद पदस्थापन को लेकर दो तरह की नीतियां न रहें और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।


दूसरे ज्ञापन में संगठन ने वर्ष 1986 के उन कर्मचारियों का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया है जिनकी पदोन्नति अब तक नहीं की गई है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस मामले पर माननीय न्यायालय में अवमानना वाद (कंटेंप्ट केस) भी चल रहा है, जो कि विभाग के हित में बिल्कुल नहीं है। इस संबंध में संगठन पूर्व में भी कई बार अपनी आवाज उठा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
तीसरे ज्ञापन के माध्यम से संघ ने मांग की है कि सत्र 2017 से 2025 तक की रिव्यू डीपीसी (समीक्षा विभागीय पदोन्नति) जल्द से जल्द आयोजित की जाए। इस रिव्यू डीपीसी के होने से लंबे समय से अटके मंत्रालयिक कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा और उन्हें बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकेगा। संघ ने प्रशासन से इन सभी जायज मांगों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई करने की अपील की है।


