पीबीएम अस्पताल: हल्दीराम हार्ट हॉस्पिटल में जटिल हृदय ब्लॉकेज का सफल उपचार
पीबीएम अस्पताल: हल्दीराम हार्ट हॉस्पिटल में जटिल हृदय ब्लॉकेज का सफल उपचार


- पहली बार अति आधुनिक आईवीएल (लीथोट्रिपसी) बैलून टेक्नोलॉजी का उपयोग कर मरीज को दी नई जिंदगी
- हार्ट की पंपिंग मात्र 30% होने पर वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पिंटू नाहटा और टीम ने किया सफल प्रोसीजर
बीकानेर, 25 मई। पीबीएम अस्पताल के हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक सफलता दर्ज की गई है। अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पिंटू नाहटा एवं उनकी टीम ने एक अत्यंत जटिल और जानलेवा हृदय ब्लॉकेज का सफल उपचार कर मरीज को जीवनदान दिया है।


सामान्य एंजियोप्लास्टी थी असंभव
डॉ. पिंटू नाहटा ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मरीज मूलाराम को गंभीर हार्ट अटैक आने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती उपचार के बाद जब मरीज की एंजियोग्राफी की गई, तो सामने आया कि हृदय की मुख्य धमनी (LAD) में एक लंबा और अत्यधिक कड़ा कैल्शिफाइड (कैल्शियम जमा हुआ) ब्लॉकेज था। कैल्शियम की इस कठोर परत के कारण वहां सामान्य एंजियोप्लास्टी और स्टैंटिंग करना पूरी तरह असंभव था, क्योंकि स्टैंट को उस जगह तक पहुंचाना और ब्लॉकेज को खोलना मुमकिन नहीं हो पा रहा था।


कम पंपिंग के कारण रोटाब्लेटर तकनीक में था जोखिम
आमतौर पर इस तरह के अत्यधिक कड़े ब्लॉकेज को खोलने के लिए ‘रोटाब्लेटर मशीन’ का उपयोग किया जाता है, जो धमनी के भीतर जमा कैल्शियम को खुरच कर और ग्राइंडिंग (पीसकर) द्वारा उसके लोड को कम करती है। लेकिन इस मरीज के मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उसके हार्ट की पंपिंग क्षमता मात्र 30 प्रतिशत रह गई थी। इस बेहद कमजोर स्थिति में रोटाब्लेटर तकनीक का इस्तेमाल करने से कई तरह के गंभीर कॉम्प्लिकेशन्स (जटिलताएं) होने की अत्यधिक संभावना थी। ऐसी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. नाहटा और उनकी टीम ने चिकित्सा जगत की अति आधुनिक आईवीएल (इंट्रा वस्कूलर लीथोट्रिपसी) बैलून टेक्नोलॉजी का उपयोग करने का निर्णय लिया, जिसका इस अस्पताल में यह पहला प्रयोग था।
कैथ लैब प्रोसीजर: तरंगों से तोड़ा गया कैल्शियम
डॉ. नाहटा ने कैथ लैब प्रोसीजर की उन्नत तकनीक के बारे में बताते हुए कहा कि सर्वप्रथम ओसीटी (OCT) इमेजिंग मशीन के माध्यम से हृदय की धमनी के अंदरूनी हिस्से की सटीक स्थिति की जांच की गई। जांच में धमनी के भीतर पूर्ण रूप से कैल्शियम की मोटी परत जमी हुई मिली और जगह-जगह कैल्शियम के कड़े नोड्यूल बने हुए थे।
इस जटिल ब्लॉकेज को खोलने के लिए आईवीएल बैलून को धमनी के भीतर ब्लॉकेज वाले हिस्से तक ले जाया गया। वहां बैलून को फुलाकर उससे विशेष सोनिक वेव्स (ध्वनि तरंगों) का विकिरण किया गया। इन उच्च क्षमता वाली तरंगों के प्रभाव से धमनी में जमा कठोर कैल्शियम के बारीक टुकड़े-टुकड़े हो गए। कैल्शियम के टूटने के बाद, मुख्य स्टैंट को आसानी से ब्लॉकेज एरिया में ले जाकर स्थापित कर दिया गया और ब्लॉकेज पूरी तरह हट गया। इस सफल प्रोसीजर के तुरंत बाद धमनियों में रक्त का प्रवाह सामान्य रूप से सुचारू हो गया।
सफल प्रोसीजर में शामिल रही यह विशेषज्ञ टीम
हल्दीराम हार्ट हॉस्पिटल की इस गौरवमयी उपलब्धि के दौरान कैथ लैब की कार्डियोलॉजी टीम में वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. पिंटू नाहटा के साथ डॉ. दिनेश चौधरी, डॉ. सुनील बुडानिया, डॉ. रामगोपाल कुमावत, डॉ. राजवीर बेनीवाल, डॉ. नजमा, कैथ लैब इंचार्ज राकेश सोलंकी, चंद्र कुमार आहूजा, पंकज तंवर, कैथ लैब नर्सिंग इंचार्ज ताहिरा बानो और सीताराम मुख्य रूप से उपस्थित रहे और इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


