अवकाश में कार्य के बदले CCL-PL देने और अव्यावहारिक काउंसलिंग पर रोक की मांग, चारों जिलों की हुई ऑडिट
अवकाश में कार्य के बदले CCL-PL देने और अव्यावहारिक काउंसलिंग पर रोक की मांग, चारों जिलों की हुई ऑडिट



- राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की संभाग बैठक
बीकानेर, 10 जून। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की बीकानेर संभागीय पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को जेलवेल परिसर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित की गई। प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बीकानेर संभाग के चारों जिलों की संगठनात्मक समीक्षा करने के साथ-साथ शिक्षकों की कई ज्वलंत समस्याओं और मांगों पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।


बैठक में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य, प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई, प्रदेश पर्यवेक्षक अंकेक्षक देवकीनंदन सुमन तथा मंडल संयुक्त मंत्री श्रीमती रेखा नारंग का मुख्य सानिध्य रहा।


चारों जिलों का हुआ आंतरिक अंकेक्षण (ऑडिट)
बीकानेर जिला मंत्री नरेंद्र आचार्य ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक के दौरान संभाग के सभी चारों जिलों का आंतरिक अंकेक्षण (इंटरनल ऑडिट) प्रदेश अंकेक्षक देवकीनंदन सुमन, प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई और प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य की देखरेख में संपन्न हुआ। इस दौरान महासंघ ने संगठनात्मक अनुशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाने, अभिलेख संधारण (रिकॉर्ड मेंटेनेंस) और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
अवकाश में कार्य के बदले CCL-PL और काउंसलिंग प्रक्रिया पर रोक की मांग
बैठक में शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ मुखर आवाज उठाई गई और एक मांग पत्र तैयार किया गया, जिसमें प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
अवकाश में सेवा का लाभ: ग्रीष्मावकाश या अन्य सरकारी अवकाश के दिनों में परीक्षा ड्यूटी देने या प्रशासनिक कार्य करवाने पर शिक्षकों को पीएल (Privilege Leave) और सीसीएल (Child Care Leave/Compensatory Leave) का लाभ दिया जाए।
अव्यावहारिक काउंसलिंग पर रोक: काउंसलिंग के नाम पर बिना किसी ठोस और व्यावहारिक आधार के कार्यालय स्तर से मनमाने तरीके से पद खोलने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
पदों की वित्तीय स्वीकृति: क्रमोन्नत (अपग्रेड) किए गए विद्यालयों में लंबे समय से लंबित पदों की वित्तीय स्वीकृति तत्काल जारी की जाए, ताकि शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो।
पदोन्नति और स्थानांतरण: तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण और पदोन्नति की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। साथ ही पदोन्नति पदस्थापन के उपरांत शिक्षकों को ‘पदोन्नति परित्याग’ का विकल्प उपलब्ध करवाया जाए।
पे-प्रोटेक्शन और टेट (TET) की अनिवार्यता पर असमंजस
मंडल संयुक्त मंत्री श्रीमती रेखा नारंग ने पे-प्रोटेक्शन को लेकर शिक्षा विभाग में चल रहे असमंजस को दूर करने के लिए सरकार से जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया। वहीं, टेट (TET) की अनिवार्यता के मुद्दे पर प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से प्रभावित सेवारत शिक्षकों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक विधायी पहल करनी चाहिए, जिससे शिक्षकों के भविष्य और सेवा सुरक्षा को लेकर बनी चिंताएं दूर हो सकें।
संगठन विस्तार और सदस्यता वृद्धि पर जोर
बीकानेर जिलाध्यक्ष मोहनलाल भादू ने क्रमोन्नत स्कूलों में पदों के अभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को भारी परेशानी हो रही है। प्रवास और संगठनात्मक बैठकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य और प्रदेश पर्यवेक्षक देवकीनंदन सुमन ने कहा कि संगठन की वास्तविक शक्ति उसके अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ताओं में है। उन्होंने प्रत्येक विद्यालय तक संगठन की विचारधारा पहुंचाने, सदस्यता वृद्धि करने और आगामी कार्यक्रमों के लिए कार्यकर्ताओं को सतत संपर्क में रहने का मार्गदर्शन दिया। हनुमानगढ़ जिला मंत्री शैलेंद्र बेदा, अनूपगढ़ जिला मंत्री तनुज अरोड़ा और गंगानगर जिला सह-संयोजक इंद्राज गोदारा ने भी विचार व्यक्त करते हुए प्रशासन के साथ सकारात्मक संवाद के जरिए शिक्षक हितों की रक्षा का संकल्प दोहराया।
यह पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस संभागीय बैठक में बीकानेर कोषाध्यक्ष मोहम्मद रमजान, महिला मंत्री श्रीमती चंद्रकला भादानी, इंद्रसेन लिम्बा, हुकमा राम, शिवराज, ओमप्रकाश, विकास पंवार, रमेश व्यास, महेश छीपा, हनुमानगढ़ कोषाध्यक्ष रामलाल और अनूपगढ़ कोषाध्यक्ष जितेंद्र कुमार सहित संभागभर के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद रहे।


