बीकानेर PBM में सिस्टम फेल? 6 प्रसूताओं की किडनी प्रभावित, 13 बार हुआ डायलिसिस; प्रशासन ने 7 दिन तक छिपाई जानकारी, अब कमेटी गठित

बीकानेर PBM में सिस्टम फेल
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
  • जोधपुर AIIMS की टीम जांच के लिए पहुंची, दवाइयों का स्टॉक बदला

बीकानेर , 10 जून। बीकानेर के पी.बी.एम. अस्पताल में एक साथ छह प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने की ख़बर ने वाकई राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले को सरकारी जाँच, विशेषज्ञों की टिप्पणियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर समझते हैं।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

क्या हुआ है बीकानेर में?
पी.बी.एम. अस्पताल के जनाना विभाग में सिजेरियन और सामान्य डिलीवरी के बाद छह महिलाओं की किडनी पर असर पड़ा। इनमें से कई को डायलिसिस पर रखा गया। सबसे गंभीर मामला प्रीति (20) का बताया जा रहा है, जिनका 13 बार डायलिसिस हो चुका है, और उनके बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही, पानी की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव तक के आरोप लगाए हैं

pop ronak

जाँच में अब तक क्या सामने आया?
राज्य सरकार ने तुरंत जोधपुर से विशेषज्ञों की एक टीम भेजी। इस टीम में माइक्रोबायोलॉजी, मेडिसिन, गायनोकोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और पी.एस.एम. के एचओडी व वरिष्ठ डॉक्टर शामिल थे। टीम ने ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, आई.सी.यू. और ब्लड बैंक का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि डॉक्टर अपनी बेस्ट सेवाएँ दे रहे हैं और

मरीज़ों की रिकवरी अच्छी है; खुद मरीज़ भी इलाज से संतुष्ट नज़र आए

चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह मामला पोस्टपार्टम हैमरेज (प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव) और उसके बाद मल्टी-ऑर्गन फेलियर से जुड़ा लगता है। उन्होंने कहा, “जब कोई महिला पहले से एनीमिक हो और भारी ब्लीडिंग हो, तो उसका असर लीवर और किडनी पर पड़ सकता है।”

ऑक्सीटोसिन और संक्रमण की आशंका

स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर और ड्रग कंट्रोलर ने मौके पर ही दवाओं के सैंपल लेकर जाँच शुरू कर दी है। राजस्थान के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रक ने कहा कि अभी तक दवाओं को इन घटनाओं से जोड़ने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है, लेकिन एहतियातन सभी दवाइयों की जाँच कराई जा रही है। हाँ, ओ.टी. और आई.सी.यू. में संक्रमण के संकेत मिलने पर प्रशासन ने तुरंत डिफॉगिंग और गहन सफाई करवाई, जो अपने आप में एक गंभीर खामी की ओर इशारा है।

क्या यह कोटा जैसा मामला है?
बिल्कुल नहीं। खुद स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोटा में सभी की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी और मौतें हुई थीं, जबकि बीकानेर में सामान्य डिलीवरी वाली महिलाएँ भी प्रभावित हैं और लक्षण भी अलग हैं। कोटा में एक ऑक्सीटोसिन बैच फेल पाया गया था और उस पर प्रतिबंध लगा (जिसकी पुष्टि मीडिया की रिपोर्ट से भी होती है) लेकिन बीकानेर में अभी तक दवा की गुणवत्ता को लेकर कोई ठोस रिपोर्ट नहीं आई है। जोधपुर से आई टीम ने भी साफ कहा कि “कोटा हॉस्पिटल जैसी यहाँ कोई बात नहीं है।”

प्रशासन की देरी और हरकत
यह सच है कि प्रशासन ने पहला केस सामने आने के 7 दिन बाद कमेटी बनाई। हालाँकि, अब प्राचार्य और अधीक्षक स्तर की दो समितियाँ काम कर रही हैं, जिनमें सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट, फिजिशियन, ड्रग कंट्रोलर और नर्सिंग इंचार्ज शामिल हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी रिपोर्ट माँगी है।

अभी की स्थिति
सभी छह महिलाएँ आई.सी.यू. में निगरानी में हैं और डायलिसिस जारी है। जाँच टीम के अनुसार, मरीज़ों की स्थिति में सुधार है और वेंटिलेटर पर मौजूद महिला की हालत भी बेहतर बताई गई है। सच्चाई यह है कि पूरा मामला पोस्टपार्टम हैमरेज से मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का लगता है, न कि किसी एक दवा या सिर्फ संक्रमण का। हाँ, अस्पताल की बुनियादी कमियाँ और जाँच में विलंब ने निश्चित रूप से इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया। दवा की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम कारण स्पष्ट हो पाएगा।

जोधपुर एम्स (AIIMS) की टीम का पहुँचना
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), जोधपुर की एक विशेष केंद्रीय टीम ने मौके पर पहुँचकर मोर्चा संभाल लिया है। यह टीम सभी पीड़ित महिलाओं के संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड और केस हिस्ट्री को अपने कब्जे में लेकर बारीकी से जाँच कर रही है। उनका मुख्य फोकस इस बात पर है कि:

1 सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान और बाद में इलाज की क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

प्रसूताओं को कौन से इंजेक्शन दिए गए और उनकी खुराक क्या थी।

2. ‘ऑक्सीटोसिन’ स्टॉक पर तत्काल कार्रवाई
कोटा कांड की पृष्ठभूमि और बीकानेर में भी इसी तरह की आशंका को देखते हुए, एहतियातन पीबीएम अस्पताल में मौजूद ‘ऑक्सीटोसिन’ इंजेक्शनों के पूरे स्टॉक को तुरंत हटा दिया गया है और उसकी जगह पड़ोसी जिले नागौर से सरकारी आपूर्ति के नए इंजेक्शन मँगवाकर इस्तेमाल शुरू किए गए हैं। यह कदम, भले ही एहतियाती हो, दवाओं की गुणवत्ता पर गहरी चिंता को दर्शाता है।

3. मरीजों की स्थिति

तारा देवी (27): एक्यूट किडनी इंजरी, गंभीर एनीमिया, फेफड़ों में पानी, पोटैशियम का खतरनाक स्तर।
शारदा (26): एक्यूट किडनी इंजरी, प्लेटलेट्स की कमी, खून का थक्का न बनने की समस्या।
राहिला (19): अत्यधिक ब्लीडिंग, प्लेटलेट्स का गिरना, गंभीर इंफेक्शन, एक्यूट किडनी इंजरी और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन।
इमरती (20): मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन, सेप्टीसीमिया (खून में गंभीर संक्रमण), एक्यूट किडनी इंजरी।
प्रीति (20): हाई ब्लड प्रेशर के कारण प्रसव के बाद दौरे (एक्लेमप्सिया), फेफड़ों में संक्रमण, एक्यूट किडनी इंजरी, संदिग्ध HELLP सिंड्रोम और मस्तिष्क पर असर की आशंका के चलते वेंटिलेटर पर।
यह विवरण स्पष्ट करता है कि स्थिति केवल किडनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पोस्टपार्टम हैमरेज, गंभीर संक्रमण और मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन का एक जटिल मामला है।

4. कोटा से सीधा संबंध – दवा की गुणवत्ता पर सवाल
खबरों में कोटा मामले का सीधा हवाला दिया गया है, जहाँ दिल्ली एम्स की जाँच में पता चला कि जो ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन दिए गए थे, उनमें आवश्यक मानक घटक ही मौजूद नहीं थे। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि बीकानेर का मामला कोटा से भिन्न है (यहाँ सामान्य डिलीवरी वाली महिलाएँ भी प्रभावित हैं और लक्षण अलग हैं), फिर भी एक ही पैटर्न पर मामले सामने आने से दवाओं की गुणवत्ता और अस्पताल की आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अभी क्या स्पष्ट नहीं है?
“इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन” लगाए जाने का जिक्र PBM अस्पताल में हाल ही में सामने आए संक्रमण के जोखिम से निपटने के प्रयासों की ओर इशारा करता है।

निष्कर्ष
AIIMS जोधपुर की टीम का आना, ऑक्सीटोसिन स्टॉक को बदलना और मरीजों की जटिल स्थिति यह दर्शाती है कि अभी तक मौत का एक भी मामला सामने न आना राहत की बात जरूर है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। असली कारणों का पता दवाओं और ऑपरेशन थिएटर के सैंपल की जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।परन्तु यह सवाल तो बना हुआ ही है कि आखिर PBM प्रशासन की लापरवाही कहां व क्यों रही ?

sjps
sesumo school

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *