एन.डी.पी.एस. न्यायालयों में अधिवक्ताओं के अधिकारों पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं होगा- बार एसोसिएशन, बीकानेर

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खमत खामणा

बीकानेर, 1 अगस्त । एन.डी.पी.एस. (NDPS) न्यायालयों में विभागीय अभियोजन अधिकारियों द्वारा अभियोजन संचालन कराए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर बार एसोसिएशन, बीकानेर ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। अधिवक्ताओं के अधिकारों पर कुठाराघात का आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, राजस्थान के विधि मंत्री, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री तथा प्रमुख शासन सचिव (गृह-विधि) को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व पत्र भेजा है।

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बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार पुरोहित ने सरकार के इस कदम पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पूर्व में अधिवक्ता कोटे से विशिष्ट लोक अभियोजकों (Special Public Prosecutors) की नियुक्ति के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए थे। इसके तहत जिला एवं सेशन न्यायाधीशों के माध्यम से योग्य अधिवक्ताओं का एक पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजा भी जा चुका है। हालांकि, चयन प्रक्रिया पूरी होने से ठीक पहले अधिवक्ताओं को दरकिनार कर विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी गई, जिससे संपूर्ण अधिवक्ता समुदाय में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।

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बार एसोसिएशन का तर्क है कि यदि सरकार की मंशा शुरुआत से ही विभागीय अभियोजन अधिकारियों से कार्य कराने की थी, तो अधिवक्ताओं से आवेदन आमंत्रित करने और पूरी चयन प्रक्रिया आयोजित करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इस तरह के परस्पर विरोधी निर्णयों से प्रशासनिक प्रक्रिया की साख पर प्रश्नचिह्न लगता है तथा अधिवक्ताओं के न्यायोचित अवसरों का हनन होता है।

एसोसिएशन ने चिंता जताते हुए कहा कि यह मामला केवल एन.डी.पी.एस. न्यायालयों तक सीमित नहीं है। यदि इस व्यवस्था को स्वीकार कर लिया गया, तो भविष्य में अन्य विशेष एवं सामान्य न्यायालयों में भी अधिवक्ता कोटे से लोक अभियोजकों की नियुक्ति की वर्षों पुरानी परंपरा समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

बार एसोसिएशन की प्रमुख मांगें:

  • एन.डी.पी.एस. न्यायालयों में विभागीय अभियोजन अधिकारियों द्वारा नियमित अभियोजन संचालन की व्यवस्था पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए।
  • अधिवक्ता कोटे से विशिष्ट लोक अभियोजकों की प्रक्रियाधीन नियुक्ति को शीघ्र पूर्ण कर नियुक्ति आदेश जारी किए जाएं।
  • चयन प्रक्रिया जारी रहते हुए यह कार्य विभागीय अधिकारियों को सौंपने का विधिक व प्रशासनिक आधार स्पष्ट किया जाए।
  • भविष्य में अधिवक्ताओं के कोटे से संबंधित निर्णय लेने से पूर्व बार एसोसिएशनों के साथ अनिवार्य रूप से विचार-विमर्श किया जाए तथा इस संदर्भ में प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल बैठक आयोजित की जाए।

बार एसोसिएशन, बीकानेर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपने निर्णय पर शीघ्र पुनर्विचार नहीं किया, तो यह मामला राज्य की संपूर्ण लोक अभियोजन व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डालेगा। ऐसी स्थिति में अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश भर की बार एसोसिएशनों के साथ समन्वय बनाकर लोकतांत्रिक एवं विधिसम्मत आंदोलन शुरू किया जाएगा।