बीकानेर की गोचर भूमि पर आवारा कुत्तों का आतंक, गाय व हिरण असुरक्षित, डॉग हाउस बनाने की उठी मांग
बीकानेर की गोचर भूमि पर आवारा कुत्तों का आतंक, गाय व हिरण असुरक्षित, डॉग हाउस बनाने की उठी मांग


बीकानेर, 05 अगस्त। बीकानेर शहर के आसपास फैली लगभग 40,000 बीघा गोचर भूमि में इन दिनों आवारा और हिंसक कुत्तों का आतंक चरम पर है। 80 वार्डों वाले बीकानेर शहर से सटी इस विशाल गोचर भूमि पर निर्भर गायें, बछड़े और दुर्लभ वन्यजीव (हिरण आदि) निरंतर शिकारी कुत्तों का शिकार बन रहे हैं। पर्यावरणविदों और गो-सेवकों ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से तुरंत डॉग हाउस के निर्माण और प्रभावी नसबंदी अभियान की मांग की है।


पर्यावरण प्रेमी मिलन गहलोत ने स्थिति की भयावहता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में गोचर भूमि में सबसे बड़ा खतरा आवारा शिकारी कुत्तों का टोला बना हुआ है। ये हिंसक कुत्ते आए दिन असहाय बूढ़ी गायों, नवजात बछड़ों और हिरणों को अपना शिकार बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि खुद को गो-भक्त बताने वाले लोग भी इस बुनियादी और विकराल समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।


शहर में भी बच्चों पर मंडरा रहा रेबीज का खतरा
मिलन गहलोत ने कहा कि केवल गोचर ही नहीं, बल्कि बीकानेर शहर के रिहायशी इलाकों में भी आवारा कुत्तों का खौफ फैला हुआ है। आये दिन सोशल मीडिया और खबरों में छोटे बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आती हैं, जिसके बाद पीड़ित परिवारों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन के लिए भटकना पड़ता है।
दर्जा बढ़ा, लेकिन धरातल पर समस्याएं जस की तस
उन्होंने स्थानीय शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीकानेर को नगर परिषद से नगर निगम बने सालों बीत चुके हैं। हाल ही में नगर विकास न्यास (UIT) को भी नगर विकास प्राधिकरण (BDA) का दर्जा दे दिया गया है और नेता अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि न तो गोचर भूमि सुरक्षित हो पाई है और न ही आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान हुआ है। प्रशासन को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांगें
डॉग हाउस का निर्माण: गोचर भूमि और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अतिशीघ्र आधुनिक डॉग हाउस शेल्टर का निर्माण कराया जाए।
नसबंदी व टीकाकरण अभियान: शहर व ग्रामीण सीमाओं में आवारा कुत्तों की नसबंदी (ABC Program) और एंटी-रेबीज टीकाकरण का कार्य युद्धस्तर पर चलाया जाए।
अतिक्रमण से मुक्ति: गोचर भूमि से सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाकर उसे वन्य जीवों और गोवंश के लिए पूर्णतः सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए।
पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम और जिला प्रशासन ने इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो मजबूरन एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


