आत्म का सुरक्षा कवच है त्याग, व्रत और नियम- साध्वी उदित यशा जी

आत्म का सुरक्षा कवच है त्याग, व्रत और नियम- साध्वी उदित यशा जी
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
  • पर्युषण पर ‘व्रत चेतना दिवस’ आयोजित

बीकानेर ,12 सितम्बर। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी श्री उदित यशा जी ने ‘व्रत चेतना दिवस’ पर अपना पावन बोध प्रदान किया। उन्होंने कहा कि हम सभी व्रत लेकर ही इस संसार में आए हैं और जिस प्रकार शरीर की सात धातुओं की रक्षा त्वचा करती है, ठीक उसी प्रकार जीवन की सुरक्षा व्रत और संयम के माध्यम से होती है।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

व्रत में निहित है चेतना के जागरण का संदेश
संयम का महत्व: साध्वी श्री उदित यशा जी ने फरमाया कि दुनिया में कोई भी वस्तु पूर्णतः सुरक्षित नहीं है, इसलिए सुरक्षा-कवच का होना अनिवार्य है। त्याग में विवेक समाहित है और व्रत चेतना के जागरण का संदेश देता है। व्रत का वास्तविक अर्थ अपने संकल्प के आगे किसी विकल्प को स्थान न देना है।

pop ronak

साधक की श्रेणियां: उन्होंने आत्म-साधक और व्यावहारिक साधक की चर्चा करते हुए ‘श्रावक चमन जी’ के दृष्टांत के जरिए समझाया कि चेतना का वास्तविक जागरण शांत भाव से व्रत पालन और संकल्प पर दृढ़ रहने से होता है।

संतोष, सेवा और संयम से ही भव-सागर से पार
साध्वी श्री संगीत प्रभा जी का विचार: उन्होंने मनुष्य की चार कोटियों (मानसिक स्थितियों) का उल्लेख करते हुए भगवान ऋषभदेव की भव-परंपरा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि वृद्धावस्था व ग्लानि के समय तपस्वी संतों की सेवा करना, देवलोक के आयुष्य का बंध करना और उचित समय पर अनशन का पालन करना आत्मा को सैकड़ों भवों के चक्र से मुक्त करता है। संतोष, सेवा और संयम आत्मा को भव-सागर से पार लगाने वाले मूल साधन हैं।

गीतिका संगान: साध्वी श्री भव्य यशा जी ने ‘व्रत चेतना दिवस’ पर अपने प्रेरक विचार रखे। तत्पश्चात साध्वी श्री भव्य यशा जी एवं साध्वी श्री शिक्षा प्रभा जी ने छोटे-छोटे दैनिक व्रतों के महत्व पर आधारित सुमधुर गीतिका का संगान कर उपस्थित श्रद्धालुओं को संयम पथ पर चलने की प्रेरणा दी।