नंजनगुड में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया व्रत चेतना दिवस
नंजनगुड में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया व्रत चेतना दिवस


- उपासिका बहनों ने दिया अणुव्रत का संदेश
नंजनगुड/बेंगलुरु ,12 सितम्बर । युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की असीम कृपा से नंजनगुड क्षेत्र में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की पावन आराधना हेतु उपासिका बहनों का शुभ आगमन हुआ है। इस पावन अवसर पर बेंगलुरु से पधारीं उपासिका श्रीमती मधु कटारिया एवं श्रीमती सरोजिनी वेद की गरिमामयी उपस्थिति में ‘व्रत चेतना दिवस’ अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ आचार्य श्री तुलसी द्वारा रचित ‘अणुव्रत गीत’ के सामूहिक संगान से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत कर दिया।


मायाचार से बचें और छोटे व्रतों से करें आत्म-कल्याण
भगवान मल्लीनाथ का दृष्टांत (उपासिका मधु कटारिया): उन्होंने तीर्थंकर भगवान मल्लीनाथ के पूर्व भव का मार्मिक वर्णन करते हुए समझाया कि किस प्रकार दीर्घकालीन कठोर तपस्या के प्रभाव से तीर्थंकर गोत्र का बंधन करने के बावजूद, केवल मायाचार (छल-कपट) के सूक्ष्म दोष के कारण उन्हें स्त्री गोत्र का बंधन करना पड़ा। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को जीवन में निष्कपटता और सरलता अपनाने का बोध दिया।


अणुव्रत का सार्वभौमिक महत्व (उपासिका सरोजिनी आर. बैद): उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे व्रतों और नियमों को अंगीकार करके व्यक्ति अपनी आत्मा का परम कल्याण कर सकता है। अणुव्रत किसी जाति या संप्रदाय विशेष की सीमा में बंधा हुआ नहीं है, बल्कि इसकी गूंज पूरे विश्व में फैली है। वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व में जो हिंसा और अशांति का वातावरण बना हुआ है, उसे दूर करने के लिए अणुव्रत की चेतना का प्रसार अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक है।
समानता का भाव और संगठनात्मक विचार
सभाध्यक्ष कैलाश मेहता का उद्बोधन: उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ण, जाति और वर्ग के भेद से परे हटकर प्रत्येक मानव के साथ समानता और आत्मीयता का व्यवहार करना ही सच्चा धर्म है।
अणुव्रत समिति अध्यक्ष का संदेश: अणुव्रत समिति के अध्यक्ष रोशनलाल नंगावत ने दैनिक जीवन में अणुव्रत के महत्व को रेखांकित किया।
तेरापंथ महिला मंडल, नंजनगुड के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रावक-श्राविकाओं एवं भाइयों-बहनों ने सहभागिता कर पर्युषण पर्व की आराधना का लाभ उठाया।
