बीकानेर नगर निगम मेयर चुनाव में अनिल कल्ला के खिलाफ नवरतन डागा की बगावत से गरमाई राजनीति, कुल चार नामांकन दाखिल
बीकानेर नगर निगम मेयर चुनाव में कुल चार नामांकन दाखिल


बीकानेर, 16 सितम्बर । बीकानेर नगर निगम में महापौर (मेयर) पद के चुनाव से ठीक पहले सत्तारूढ़ दल की तरह उभरकर सामने आई कांग्रेस के भीतर बगावत और अंदरूनी कलह तेज हो गई है। 28 पार्षदों की कथित सहमति के बाद कांग्रेस ने जहां वार्ड 73 से बी डी कल्ला के भतीजे विजयी पार्षद अनिल कल्ला को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित करते हुए सिंबल दिया है, वहीं पार्टी से टिकट नहीं मिलने से नाराज वार्ड 50 से पार्षद नवरतन डागा ने बागी तेवर अपनाते हुए पर्चा दाखिल कर दिया है। ज्ञात रहे अभी शहर कांग्रेस का मुख्य कार्यालय नवरतन डागा के माकन में चल रहा है ऐसी स्थिती में नवरतन डागा को नाराज करना कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ से वार्ड 13 के पार्षद सुरेंद्र सिंह शेखावत मैदान में उतरे हैं।


तीन प्रत्याशी और चार नामांकन


मेयर पद के लिए कुल तीन प्रत्याशियों के जरिए चार नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं।
अनिल कल्ला (कांग्रेस): 1 नामांकन पत्र जमा कराया। सुरेंद्र सिंह शेखावत (भाजपा): 1 नामांकन पत्र जमा कराया। नवरतन डागा (बागी candidate): कुल 2 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं—एक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में और दूसरा कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर। हालांकि, पार्टी सिंबल न होने के कारण कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दाखिल डागा का पर्चा खारिज होने की पूरी संभावना है।
प्रस्तावकों की स्थिति
नवरतन डागा: इनके दोनों नामांकनों में निर्दलीय पार्षद प्रस्तावक बने हैं। एक पर्चे में निशा पारीक और दूसरे में दीपक तंवर ने प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं।
अनिल कल्ला: इनके प्रस्तावक के रूप में पार्षद नवल पुरोहित ने नाम आगे बढ़ाया है। सुरेंद्र सिंह शेखावत: इनके प्रस्तावक पार्षद दीपक व्यास बने हैं।
सिंबल लाना भूल गए भाजपा प्रत्याशी
भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह अपने नामांकन के साथ सिंबल लाना भूल गए। ऐसे में उन्हें काफी देर तक रिटर्निंग ऑफिसर के सामने खड़ा रहना पड़ा। बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्यप्रकाश आचार्य नामांकन लेकर पहुंचे। इसके बाद नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो सकी।
परिवारवाद पर डागा का तीखा हमला

मेयर पद की दौड़ में शामिल रहे नवरतन डागा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकते ही पार्टी नेतृत्व और कल्ला परिवार पर सीधे सवाल उठाए हैं। डागा ने कहा कि आखिर बार-बार संगठन में एक ही परिवार को मौका क्यों दिया जाता है? आम और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के हक की अनदेखी कब तक होगी? उल्लेखनीय है कि डागा जिस वार्ड 50 से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं, वह टिकट वितरण के समय से ही विवादों में रहा है। उस दौरान पार्टी के अंदरूनी असंतोष के चलते शहर जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना भी घटी थी।
चुनावी गणित पर प्रभाव
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में से कांग्रेस ने 42 सीटों पर जीत हासिल कर 41 के जादुई आंकड़े को पार करते हुए स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। हालांकि cross-voting और बगावत के अंदेशे के चलते कांग्रेस अपने पार्षदों को जैसलमेर के एक निजी रिसॉर्ट में बाड़ेबंदी में रखे हुए है। डागा के चुनाव मैदान में डटे रहने से वोटों का बिखराव हो सकता है, जिससे भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के लिए नई उम्मीदें बनती दिख रही हैं। अब देखना यह होगा कि 18 सितंबर को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक पार्टी आलाकमान डागा को मनाने में सफल रहता है या मुकाबला त्रिकोणीय बना रहता है।
