स्थापत्य कला विशेषज्ञ चम्पालाल गहलोत को मिला श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026
स्थापत्य कला विशेषज्ञ चम्पालाल गहलोत को मिला श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026



- मालचंद तिवाड़ी बोले- ‘गहलोत ईंट-पत्थर के नहीं, संवेदनाओं के शिल्पी हैं’
बीकानेर, 18 सितम्बर। प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को लक्ष्मी नारायण रंगा सृजन सदन में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में बीकानेर की पारंपरिक स्थापत्य कला, वास्तु कला तथा धरोहर संरक्षण में अतुलनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ स्थापत्य कला विशेषज्ञ चम्पालाल गहलोत को ”श्रीमती कमला रंगा सृजन सेवा सम्मान-2026” से विभूषित किया गया।


बीकानेर के लाल पत्थर और नक्काशी की परंपरा को बनाया आधुनिक भवनों का हिस्सा


मुख्य अतिथि का वक्तव्य: समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, आलोचक एवं चिंतक मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि साहित्य और स्थापत्य कला दोनों ही समाज की अनमोल धरोहर हैं। उन्होंने चम्पालाल गहलोत को महज स्थापत्य विशेषज्ञ नहीं बल्कि ‘संवेदना शिल्पी’ बताते हुए कहा कि गहलोत ने बीकानेर की पारंपरिक स्थापत्य कला—जैसे लाल पत्थर की नक्काशी, झरोखों की लय और जालियों की छाया—को आधुनिक भवनों में पुनर्जीवित कर नया अध्याय जोड़ा है।
अध्यक्षीय उद्बोधन: वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि सृजन केवल शब्द लिखने में नहीं, बल्कि कला को गढ़ने में भी होता है। चम्पालाल गहलोत ने स्थापत्य कला को व्यवसाय न मानकर एक साधना माना है, जिससे यह कला सृजन सेवा बन गई है।
विशिष्ट अतिथि का संबोधन: वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. नरसिंह बिनानी ने कहा कि बीकानेर की पारंपरिक स्थापत्य कला को बचाना एक बड़ी चुनौती है। गहलोत ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए स्थापत्य की मूल आत्मा को जीवित रखा और नई पीढ़ी को इस विधा में प्रशिक्षित किया।
साफा, शॉल और अभिनंदन-पत्र देकर किया गया अभिनंदन
प्रारंभ में स्वागताध्यक्ष वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने चम्पालाल गहलोत के दशकों के योगदान का परिचय दिया। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा गहलोत को माला, साफा, उपरणा, श्रीफल, शॉल एवं अभिनंदन-पत्र अर्पित कर सम्मानित किया गया।
सम्मान के जवाब में चम्पालाल गहलोत ने भावुक होकर कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत न होकर बीकानेर की समृद्ध स्थापत्य कला और गौरवशाली परंपरा का सम्मान है।
समारोह में राजेश रंगा, अशोक शर्मा, किशन देराश्री, अरुण जे. व्यास, भवानी सिंह राठौड़, पुनीत कुमार रंगा, नवनीत व्यास, गिरिराज पारीक, कासिम बीकानेरी, आशीष रंगा, तोलाराम सारण, रामेश्वर सुथार, जुल्फीकार और श्याम चुरा सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कवि गिरिराज पारीक ने किया तथा अंत में आभार भवानी सिंह राठौड़ ने व्यक्त किया।
