तेरापंथ भवन गंगाशहर में विकास महोत्सव आयोजित

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  • साध्वी त्रिशला कुमारी जी बोलीं— ‘मर्यादाएं और सम्यक पुरुषार्थ ही तेरापंथ धर्मसंघ के विकास का मूल’

गंगाशहर ,20 सितम्बर 2026। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी के पावन सानिध्य में ‘विकास महोत्सव’ का गरिमामय आयोजन तेरापंथ भवन गंगाशहर में किया गया। इस अवसर पर साध्वीवृंद ने तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्यों के ऐतिहासिक अवदानों, मर्यादाओं, अणुव्रत और अध्यात्म की विकास यात्रा पर विस्तृत प्रकाश डाला।

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आत्मविश्वास और अनुशासन से ही संभव है विकास: साध्वी त्रिशला कुमारी जी

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आचारांग सूत्र के सूक्त “होउ कामेणं” (मैं कुछ होना चाहता हूँ, कुछ करना चाहता हूँ) का उल्लेख करते हुए साध्वीश्री त्रिशला कुमारी जी ने कहा:

मर्यादा और व्यवस्था: तेरापंथ धर्मसंघ के विकास का मुख्य आधार आचार्य भिक्षु द्वारा निर्मित मर्यादाएं और अनुशासन हैं। आचार्य भिक्षु ने आने वाले आचार्यों को व्यवस्थाओं में समयानुकूल परिवर्तन का खुला आकाश प्रदान किया।

आचार्य तुलसी का युगान्कारी योगदान: चतुर्थ पट्टधर आचार्य जीतमल जी द्वारा निर्मित धार्मिक मार्ग को राजपथ बनाने का श्रेय युगप्रधान आचार्य तुलसी को जाता है। उन्होंने समण श्रेणी की स्थापना कर जैन व जैनेतर समाज को धर्म से जोड़ा।

भाषा एवं साहित्य में क्रांति: पूर्व में मुख्य रूप से संस्कृत तक सीमित प्रवचनों को हिंदी में प्रस्तुत करने की शुरुआत आचार्य तुलसी ने कराई। आचार्य महाप्रज्ञ जी द्वारा लिखित ‘जीव अजीव’ पुस्तक के साथ हिंदी साहित्य सृजन का नया अध्याय शुरू हुआ। आज प्राकृत, संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी चारों भाषाओं में संघ का कार्य प्रसारित हो रहा है।

तेरापंथ भवन गंगाशहर में विकास महोत्सव आयोजित

आचार्य महाप्रज्ञ जी की गुरुभक्ति का प्रतीक है विकास महोत्सव
साध्वी सम्यक्त्व यशा जी ने बताया कि आचार्य तुलसी के पट्टोत्सव को 33वें विकास महोत्सव के रूप में मनाने का चिंतन आचार्य महाप्रज्ञ जी की देन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि आत्मा की उज्ज्वलता, नैतिकता और प्रामाणिकता में निहित है।

साध्वी निश्चय प्रभा जी ने कहा कि यह दिवस आचार्य तुलसी के अवदानों—अणुव्रत, तेरापंथ प्रबोध, श्रावक संबोध तथा आगम संपादन—को स्मरण कर उनके दर्शन पर चलने के संकल्प का दिन है।

साध्वी कल्पयशा जी ने सम्यक पुरुषार्थ और कार्यक्षमता के नियोजन से सर्वांगीण विकास का संदेश दिया, जबकि साध्वी रश्मिप्रभा जी ने सुमधुर गीतिका का संगान किया।

तपस्या का पचखान और गणमान्यजनों के विचार
कार्यक्रम के दौरान श्राविका लीला देवी पारख ने 13 की उग्र तपस्या का पचखान ग्रहण किया तथा 15 की तपस्या के भाव व्यक्त किए।

समारोह में जैन लूणकरण छाजेड़, अमरचंद सोनी, देवेंद्र डागा, धर्मेंद्र डाकलिया, मनोज छाजेड़, तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष प्रेम बोथरा, रतन लाल छल्लाणी तथा मीनाक्षी आंचलिया ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का कुशल संचालन संतोष बोथरा ने किया।

 

 

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