साधुमार्गी जैन महिला समिति का दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर ‘स्वर्णकुंभ’ संपन्न
साधुमार्गी जैन महिला समिति का दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर 'स्वर्णकुंभ' संपन्न



- उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि बोले— ‘श्राविकाएं भौतिक सुख छोड़ आत्म-कल्याण का लक्ष्य रखें’
बीकानेर (20 सितम्बर 2026)। अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन महिला समिति का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘स्वर्णकुंभ’ रविवार को गंगाशहर मार्ग स्थित आदिनाथ भवन में संपन्न हुआ। साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय संत आचार्य प्रवर रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि एवं चारित्र आत्माओं के पावन सानिध्य में आयोजित इस सम्मेलन का समापन पारितोषिक वितरण एवं “पढमं नाणं तओ दया” के सामूहिक संकल्प पत्र वितरण के साथ हुआ। देश के विभिन्न प्रांतों से आई लगभग 400 महिला पदाधिकारियों एवं सदस्याओं ने इसमें भाग लिया।


विशेष जिज्ञासा समाधान: ‘समता भाव से कषायों का त्याग करें’
विशेष जिज्ञासा समाधान सत्र को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक क्रियाओं का एकमात्र ध्येय आत्म-शुद्धि, आत्म-चेतना और आत्म-कल्याण होना चाहिए।


कषायों का त्याग: उन्होंने कहा कि भौतिक सुख प्रारब्ध और पुरुषार्थ से स्वतः प्राप्त होते हैं। मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ, मोह और हीन भावना का त्याग कर जीवन पथ का सही चालक बनना चाहिए।
समता और स्वीकारोक्ति: घृणा और अत्यधिक प्रेम दोनों ही कर्म बंधन के कारण हैं। साधकों को दूसरों के अवगुण देखने की बजाय अपनी भूलों को स्वीकार कर सद्गुणों का विकास करना चाहिए।
पारिवारिक मूल्य: उन्होंने अप्राकृतिक प्रक्रियाओं से बचते हुए प्रत्येक जीव को आत्मीय प्रेम और सम्मान देने का संदेश दिया।
ध्यान-साधना एवं आगम अध्ययन का संदेश
सेवा सदन में आयोजित सत्रों में साध्वी राममित्रा श्रीजी के सानिध्य में ‘रामामृतम ध्यान साधना’ का आयोजन हुआ। साध्वी श्री रामप्रीति म.सा. ने ‘कम, धीरे, मीठा और सार्थक’ बोलने की सीख दी, जबकि नीरज मुनि ने ‘आगम ऑल इन वन’ के माध्यम से जैन आगमों के नियमित अध्ययन पर बल दिया।
समापन समारोह: ‘एक संस्कारी श्राविका से सशक्त होता है पूरा परिवार’
समापन सत्र में राष्ट्रीय व प्रांतीय स्तर के पदाधिकारियों ने विचार व्यक्त किए:
संस्कार और शिक्षा: अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र गांधी ने कहा कि एक श्राविका के संस्कारी और धार्मिक होने से पूरा परिवार व समाज सशक्त होता है।
व्यक्तित्व में स्वर्ण सा निखार: महिला समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष चंचल सांखला ने श्राविकाओं से देव, गुरु और धर्म के प्रति समर्पित रहकर अपने जीवन को सोने की तरह निखारने का आह्वान किया।
गतिविधियों का विवरण: राष्ट्रीय महामंत्री प्रीति डागा ने केसरिया कार्यशाला, साधार्मिक सेवा, छात्रवृत्ति एवं धार्मिक परीक्षाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बीकानेर शिविर को ऐतिहासिक बताया।
संकल्प पत्र वितरण: पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री स्नेहलता कोठारी (दिल्ली) ने सभी 400 संभागियों को “पढमं नाणं तओ दया” संकल्प पत्र प्रदान किया, जो आत्म-चिंतन और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।
दशवैकालिक सूत्र का संदेश: राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष नीतू मुहणोत ने बताया कि यह शिविर दशवैकालिक सूत्र के अमर सिद्धांतों पर आधारित था, जो सिखाता है कि दया और करुणा के मार्ग पर चलने से पहले सम्यक ज्ञान का होना अनिवार्य है।
कार्यक्रम में सुरेश बच्छावत, कन्हैया लाल बैद और महेश नाहटा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
