2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे, चार्ज के विरोध में QR कोड ढकेंगे व्यापारी
2 अक्टूबर को 'नो UPI डे, चार्ज के विरोध में QR कोड ढकेंगे व्यापारी



- चुनाव आयोग के मुद्दे पर साथ आए टीएमसी व वामदल
नई दिल्ली/कोलकाता, 27 सितम्बर। एक ओर जहां ऑनलाइन भुगतानों पर संभावित शुल्कों के विरोध में व्यापारियों ने आगामी 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ (No UPI Day) मनाने और अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड (QR Code) ढकने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी ओर देश के राजनीतिक गलियारों में भी बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे तृणमूल कांग्रेस (TMC) और वामदलों (Left Front) के बीच अब संवाद की शुरुआत हो गई है।


ममता बनर्जी और एम. बेबी के बीच फोन पर हुई चर्चा
हाल ही में चुनाव आयोग को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव एम. बेबी के बीच फोन पर दूरभाष पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। हालांकि दोनों दल विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक का हिस्सा हैं, लेकिन बंगाल के राजनीतिक समीकरणों के कारण अब तक दोनों में कोई सीधा औपचारिक संपर्क नहीं था। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए संयुक्त अभियान चलाने पर सहमति जताई।


इंडिया’ गठबंधन की आपात बैठक बुलाने की अपील
माकपा महासचिव एम. बेबी द्वारा विपक्षी नेताओं को लिखे गए पत्र के जवाब में ममता बनर्जी ने सहमति व्यक्त की। ममता बनर्जी ने इसके पश्चात कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी फोन पर बातचीत की और देश के मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए अगले दो से तीन दिनों के भीतर ‘इंडिया’ गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने की पुरजोर अपील की।
पत्र के मुख्य बिंदु और विपक्ष की मांगें
माकपा महासचिव ने अपने पत्र में चुनाव आयोग की ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा था कि इससे करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर संकट मंडरा रहा है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव आयोग के कामकाज की निष्पक्ष जांच कराने तथा विवादित प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है।
गौरतलब है कि राज्य के हालिया घटनाक्रमों और चुनाव परिणामों के बाद टीएमसी को आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में वामदलों के साथ यह नया संवाद बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।
