उवसग्गहरं पूजन में गूंजे भक्ति के स्वर; वल्लभ गुरु की पुण्यतिथि पर आयोजित तीन दिवसीय आराधना का दूसरा दिन संपन्न
उवसग्गहरं पूजन में गूंजे भक्ति के स्वर

- रांगड़ी चौक पौषधशाला में भगवान पार्श्वनाथ का हुआ सामूहिक पूजन-पाठ; उपसर्गों के नाश और आत्मकल्याण की भावना से उमड़ा श्रीसंघ
बीकानेर, 07 अक्टूबर । रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में तपागच्छीय गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री प्रीतिरत्ना, साध्वीश्री प्रीतिसुधा एवं साध्वीश्री प्रीतियशा महाराजसा आदि ठाणा-3 की पावन निश्रा में चल रहे तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के दूसरे दिन बुधवार को उवसग्गहरं पूजन का भव्य आयोजन हुआ। वल्लभ गुरु की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित इस आराधना में पाली से पधारे विधिकारक नितेश भाई एवं कामेश भाई ने विधि-विधान से अष्टप्रकारी पूजा संपन्न करवाई।


- मंत्रोच्चार और भक्तिभाव से गूंजी पौषधशाला
पूजन का शुभारंभ “उवसग्गहरं पासं…” गाथा के संगीतमय गायन एवं नवकार मंत्र के साथ हुआ। चातुर्मास लाभार्थी परिवार के सुरेंद्र बद्धाणी ने बताया कि अष्टप्रकारी पूजा के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने विभिन्न मुद्राओं एवं मंत्रोच्चार के साथ जल, पुष्प, अक्षत एवं नैवेद्य अर्पित किए। जल भाव मुद्रा में 108 बार अर्पण कर रोग, शोक एवं शारीरिक-मानसिक विकारों से मुक्ति की प्रार्थना की गई। संगीत की सुमधुर धुनों पर भगवान पार्श्वनाथ की महिमा का गुणगान करते हुए श्रीसंघ ने आत्मसंयम और संयमित जीवन का संकल्प लिया।


- रक्षा पोटली का हुआ वितरण, आयोजित होगा ‘ऋषि मंडल पूजन’
जैन परंपरा में आचार्य भद्रबाहु स्वामी रचित उवसग्गहरं स्तोत्र को समस्त बाधाओं और उपसर्गों का नाश करने वाला माना गया है। पूजन के समापन पर सभी सहभागी श्रावक-श्राविकाओं को नियम-व्रत के साथ धारण करने हेतु रक्षा पोटली प्रदान की गई। इस पूजन का मुख्य लाभ गुलाबचंद, कुमारचंद एवं विनोददेवी परिवार ने प्राप्त किया। व्यवस्थाओं में पद्मप्रभु ट्रस्ट के अजय बैद, शांतिलाल कोचर, महेंद्र जैन व महेंद्र कोचर सक्रिय रहे। तीन दिवसीय श्रृंखला के अंतिम दिन, 8 अक्टूबर को ऋषि मंडल पूजन के साथ धार्मिक आयोजनों का समापन होगा।
