नवरात्रि पर मातृशक्ति के स्वास्थ्य की अनूठी पहल
नवरात्रि पर मातृशक्ति के स्वास्थ्य की अनूठी पहल

- छात्राओं के लिए स्तन एवं सर्वाइकल कैंसर जागरूकता सत्र आयोजित
बीकानेर, 11 अक्टूबर । शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन शक्ति की आराधना के साथ मातृशक्ति के स्वास्थ्य और सुरक्षा का संदेश देते हुए बीकानेर में एक सार्थक सामाजिक पहल की गई। नीट प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करवाने वाले जॉनी सर, जगदीश सेवग सर एवं डॉ. शांतनु सर की ट्यूशन कक्षाओं में अध्ययनरत 16 से 20 वर्ष आयु वर्ग की छात्राओं के लिए स्तन एवं सर्वाइकल कैंसर जागरूकता का विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया।


स्नेहलता व्यास मेमोरियल ट्रस्ट तथा आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. पंकज टांटिया द्वारा संचालित कैंसर रिलीफ सोसायटी ‘उम्मीद’ के संयुक्त तत्वावधान में यह सत्र आयोजित हुआ, जिसमें छात्राओं को महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर, उनके संभावित लक्षण, प्रारंभिक पहचान और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।


ऑडियो-विजुअल माध्यम से समझाया स्वयं स्तन परीक्षण
डॉ. पंकज टांटिया ने ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से छात्राओं को स्तन कैंसर की प्रारंभिक पहचान के महत्व और स्वयं स्तन परीक्षण (Self-Breast Examination) की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि महिलाओं को नियमित रूप से अपने स्तनों के सामान्य आकार और बनावट से परिचित रहना चाहिए। मासिक धर्म होने वाली महिलाओं को माह में एक बार मासिक धर्म समाप्त होने के बाद तथा जिन महिलाओं को मासिक धर्म नहीं आता, उन्हें महीने में किसी निश्चित दिन यह परीक्षण अवश्य करना चाहिए।
डॉ. टांटिया ने दर्पण के सामने खड़े होकर, स्नान करते समय तथा पीठ के बल लेटकर स्तन की जांच करने के तीन प्रमुख तरीके बताए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्व-परीक्षण नियमित चिकित्सकीय जांच या मैमोग्राफी का विकल्प नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने का एक सरल माध्यम है। यदि स्तन में कोई गांठ, आकार में बदलाव या असामान्य स्राव जैसी स्थिति दिखे, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
सर्वाइकल कैंसर और एचपीवी टीकाकरण पर जोर
प्रशिक्षण सत्र के दौरान छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक करते हुए इसके बचाव में एचपीवी (HPV) टीकाकरण की भूमिका और उचित आयु में टीका लगवाने के महत्व के बारे में भी बताया गया। वक्ताओं ने जोर दिया कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या पर संकोच करने के बजाय परिवार और चिकित्सकों से खुलकर संवाद करना चाहिए।
वक्ताओं के विचार
किशन व्यास (संरक्षक, स्नेहलता व्यास मेमोरियल ट्रस्ट): हमारा उद्देश्य महिलाओं और युवतियों में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान के प्रति जागरूकता फैलाना है। एक जागरूक छात्रा अपने परिवार और आसपास की महिलाओं तक सही संदेश पहुँचाकर समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।
जॉनी सर: विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और समाज के प्रति संवेदनशील बनाना भी आवश्यक है।
जगदीश सेवग: समाज में कैंसर से जुड़ी भ्रांतियों और झिझक को वैज्ञानिक एवं प्रमाणिक जानकारी के माध्यम से ही दूर किया जा सकता है।
डॉ. शांतनु: शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
विनय थानवी: नवरात्रि में मातृशक्ति की आराधना के साथ उनके स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा के लिए जागरूकता फैलाना एक बेहद सार्थक कदम है।
सत्र के अंत में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक स्तन कैंसर, स्व-परीक्षण और टीकाकरण से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका डॉ. पंकज टांटिया ने सरल एवं वैज्ञानिक भाषा में समाधान किया।

