एनआरसीसी एवं कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के मध्य एमओयू हस्ताक्षर
एनआरसीसी एवं कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के मध्य एमओयू हस्ताक्षर

- ऊँटनी का दूध है ‘चलती-फिरती फार्मेसी’, मूल्य संवर्धन और विपणन से सुधरेगा पशुपालकों का आर्थिक स्तर: डॉ. अनिल पूनिया
बीकानेर/जोधपुर, 16 अक्टूबर । भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC), बीकानेर एवं कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित गरिमामयी कार्यक्रम में एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया एवं कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत ने इस एमओयू दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर भाकृअनुप–केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर के निदेशक डॉ. एच. एस. जाट बतौर अतिथि उपस्थित रहे।


ऊँटनी का दूध ‘चलती-फिरती फार्मेसी’, उद्यमिता को दें बढ़ावा


एनआरसीसी निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने इस साझेदारी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऊँटनी के दूध को यदि ‘चलती-फिरती फार्मेसी’ कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि गत दो दशकों से केंद्र ऊँटनी के दूध के औषधीय गुणों को उजागर कर रहा है। अब समय आ गया है कि इस अमृततुल्य दूध और इसके मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों (Value-Added Products) का लाभ आमजन तक पहुँचे। इसके लिए उष्ट्र संरक्षण के साथ-साथ दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण, व्यवसायीकरण और विपणन को बढ़ावा देकर पशुपालकों को उद्यमिता से जोड़ना होगा, जिससे उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार हो सके।
घटती संख्या पर चिंता और वैज्ञानिक समाधान
कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वीरेंद्र सिंह जैतावत ने राज्य पशु ऊँट की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एमओयू का मुख्य उद्देश्य उष्ट्र प्रजाति के संरक्षण, स्वास्थ्य प्रबंधन एवं नस्ल सुधार हेतु ठोस वैज्ञानिक कदम उठाना है। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त पहल विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
ऊँट बचाओ अभियान को मजबूती देने का आह्वान
काजरी निदेशक डॉ. एच. एस. जाट ने ‘ऊँट बचाओ अभियान’ को धरातल पर मजबूती देने के लिए सभी संस्थानों को एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। वहीं एनआरसीसी पीएमई सेल प्रभारी डॉ. राकेश रंजन और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की सदस्य श्रीमती भावना शर्मा ने इस साझेदारी को पश्चिमी राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि-पशुपालन अनुसंधान के लिए मील का पत्थर बताया।
कार्यक्रम में वित्त नियंत्रक मेवाराम बालन, डॉ. प्रदीप पगारिया सहित अनेक वैज्ञानिक व अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में केकेवीके की नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका स्वामी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

