आर्य समाज बीकानेर में वेद प्रचार और स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी समारोह
आर्य समाज बीकानेर में वेद प्रचार और स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी समारोह

डॉ. निष्ठा वेदालंकार ने बताई ‘मित्र दृष्टि’ की महत्ता, भजनों से गूंजा प्रांगण


बीकानेर, 19 अक्टूबर। महर्षि दयानन्द मार्ग (पुराना जेल रोड) स्थित आर्य समाज मंदिर में चल रहे चार दिवसीय वेद प्रचार और स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी समारोह के तीसरे दिन रविवार को धर्म प्रेमियों का तांता लगा रहा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातकालीन यज्ञ से हुई, जिसमें यज्ञ के ब्रह्मा स्वामी सुखानंद जी ने यजुर्वेद के मंत्रों की व्याख्या करते हुए अंतर्यामी प्रभु की महिमा पर प्रकाश डाला।



समारोह के मुख्य सत्र में विख्यात वक्ता डॉ. निष्ठा जी वेदालंकार ने यजुर्वेद के मंत्र ‘मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे’ की विवेचना करते हुए कहा कि हमें अपने जीवन को दृढ़ बनाते हुए हर प्राणी को मित्र की दृष्टि से देखना चाहिए और परस्पर एक-दूसरे के प्रति सद्भाव रखना चाहिए। उन्होंने सच्चे मित्र की परिभाषा बताते हुए कहा कि वही सच्चा साथी है जो अपने मित्र को पाप कर्मों से दूर रखता है। इस अवसर पर आर्य जगत के मूर्धन्य विद्वान आचार्य आर्य नरेश ने स्वामी श्रद्धानन्द जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें दलितों का सच्चा उद्धारक बताया और शुद्धि सभा के माध्यम से उनके द्वारा चलाए गए समाज सुधार कार्यों को याद किया। ख्यातनाम भजनोपदेशक दिनेश जी पथिक ने अपनी मधुर स्वर लहरियों से मनमोहक भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। आर्य समाज के प्रधान महेश आर्य ने बताया कि इस चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन मंगलवार, 20 अक्टूबर को प्रातकालीन सत्र के साथ होगा।

