साध्वीश्री प्रीतिसुधाजी ने बताए आचार्यों के 36 मूल गुण और ऐतिहासिक प्रसंग
साध्वीश्री प्रीतिसुधाजी ने बताए आचार्यों के 36 मूल गुण और ऐतिहासिक प्रसंग

- रांगड़ी चौक पौषधशाला में नवपद ओली के तीसरे दिन हुई आचार्य पद की आराधना
बीकानेर, 20 अक्टूबर। रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में तपागच्छीय गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री प्रीतिरत्ना, साध्वीश्री प्रीतिसुधा एवं साध्वीश्री प्रीतियशा महाराजसा आदि ठाणा-3 की पावन निश्रा में चल रही नौ दिवसीय श्री नवपद ओली आराधना के तीसरे दिन मंगलवार को सिद्धचक्र के तीसरे पद ‘आचार्य पद’ की आराधना श्रद्धा और उल्लास के साथ की गई।


इस अवसर पर साध्वीश्री प्रीतिसुधाजी ने अपने प्रवचन में आचार्य भगवंतों के गुणों, संयमित जीवन, शास्त्रज्ञान, संघ संचालन और जिनशासन के प्रति समर्पण का विस्तृत विवेचन किया। उन्होंने कालकाचार्य के प्रसंग और विभाजनकाल के दौरान आचार्य विजय वल्लभसूरिश्वरजी के ऐतिहासिक प्रसंग का स्मरण करते हुए बताया कि सच्चे आचार्य का जीवन आत्मसाधना के साथ-साथ संघ की रक्षा और जीवों के कल्याण के लिए समर्पित रहता है। इस दौरान कल्याण मित्र मंडल की ओर से गुड़ की प्रभावना की गई। नवपद ओली के चौथे दिन बुधवार को उपाध्याय पद की आराधना की जाएगी।




