नौ कुंडों में दी गई आहुतियां, मानवता की रक्षा और विश्व शांति का संकल्प

नौ कुंडों में दी गई आहुतियां, मानवता की रक्षा और विश्व शांति का संकल्प
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  • तिलक नगर में गायत्री महायज्ञ

बीकानेर, 14 मार्च । शांति कुंज हरिद्वार के तत्वावधान में बीकानेर के तिलक नगर क्षेत्र में आयोजित नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन भक्ति और समाज जागरण की अद्भुत धारा प्रवाहित हुई। यज्ञशाला में मंत्रोच्चार के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर न केवल आत्मिक शांति, बल्कि वैश्विक कल्याण की भी कामना की।

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विधि-विधान से संपन्न हुआ यज्ञ कर्म
यज्ञ का प्रारंभ पारंपरिक गुरु वंदना के साथ हुआ। मुख्य यज्ञ कर्ता गोपाल जी स्वामी के निर्देशन में देव पूजन, देव आवाहन, न्यास और अग्नि स्थापना जैसी शास्त्रीय प्रक्रियाएं संपन्न हुईं।

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विशेष आहुतियां: गायत्री मंत्र के साथ-साथ महाकाल की पांच विशेष आहुतियां दी गईं। इसके अतिरिक्त रुद्र और अन्य देवी-देवताओं के लिए भी आहुतियां समर्पित की गईं।

हनुमान जी की वंदना: कार्यक्रम स्थल पर हनुमान मंदिर होने के कारण पवनपुत्र हनुमान के निमित्त भी विशेष आहुतियां अर्पित की गईं।

संकल्प: संस्कृति और ज्ञान का विस्तार
यज्ञ मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे समाज सुधार से भी जोड़ा गया।

साहित्य प्रसार का संकल्प: इस अवसर पर 20 महिलाओं और 12 पुरुषों ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया। प्रत्येक सदस्य ने कम से कम 5 नए परिवारों तक गायत्री परिवार का साहित्य पहुंचाकर उन्हें संस्कारों से जोड़ने का बीड़ा उठाया।

नारी शक्ति की भागीदारी: डॉ. सोनाली सक्सेना के नेतृत्व में महिला शक्ति ने कार्यक्रम में अग्रणी भूमिका निभाई। ललिता शर्मा, उमा गुप्ता, पूनम सुथार और मधु चौधरी जैसी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय योगदान दिया।

देशभक्ति के उद्घोषों से गूंजा पांडाल
यज्ञ के दौरान वातावरण केवल मंत्रों से ही नहीं, बल्कि देशभक्ति के नारों से भी सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ “हम बदलेंगे, युग बदलेगा”, “जागेगी नारी शक्ति” और “भारत माता की जय” के नारे लगाए।

यज्ञ कर्म प्रशिक्षण का समापन
भारत भूषण गुप्ता के निर्देशन में पिछले 9 दिनों से चल रहे यज्ञ कर्म प्रशिक्षण सत्र का भी आज समापन हुआ। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को यज्ञ की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक बारीकियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के अंत में कन्याओं द्वारा श्रद्धालुओं का जल से अभिषेक और पुष्प वर्षा की गई, जिससे पूरा वातावरण अत्यंत मंगलकारी हो गया।

 

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