लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में सजी काव्य रंगत, साहित्यकारों ने दी भावांजलि
लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में सजी काव्य रंगत, साहित्यकारों ने दी भावांजलि



- ‘ऊंचा घणां मकान, मिनख बावनियो हुयो’
बीकानेर, 9 मार्च । देश के ख्यातनाम साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा की तीसरी पुण्यतिथि के अवसर पर ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह के तहत एक भव्य काव्य रंगत का आयोजन किया गया। प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थानी, हिंदी और उर्दू की त्रिवेणी बही, जहाँ साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कीर्तिशेष रंगा को शब्दांजलि अर्पित की।


रंगा का साहित्य समाज की अनमोल धरोहर: इंद्रा व्यास
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती इंद्रा व्यास ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा की साहित्यिक विरासत को संजोना समाज की जिम्मेदारी है, क्योंकि उनका रचना संसार प्रयोगधर्मी और प्रेरणादायक रहा है। इस दौरान उन्होंने खेजड़ी को समर्पित अपनी राजस्थानी कविता का प्रभावी वाचन भी किया।


चर्चित गजल से गूँजा ‘सृजन-सदन’
कार्यक्रम में राजस्थानी के वरिष्ठ कवि कमल रंगा ने जब कीर्तिशेष रंगा की सुप्रसिद्ध गजल— ‘ऊंचा घणां मकान, मिनख बावनियो हुयो / गुण पूग्या पताळ, कै अबै केवां कैने’ प्रस्तुत की, तो श्रोता भावविभोर हो गए। रंगा की यह पंक्तियाँ आधुनिक समय में मानवीय मूल्यों के पतन पर गहरा कटाक्ष करती हैं।
हिंदी, राजस्थानी और उर्दू का संगम
काव्य रंगत में वरिष्ठ और युवा रचनाकारों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं से समां बांध दिया।
शायर और कवि: जाकिर अदीब, हरिशंकर आचार्य, नगेन्द्र किराडू, जुगलकिशोर पुरोहित, श्रीमती मनीषा आर्य, कासिम बीकानेरी, और डॉ. नरसिंह बिन्नाणी सहित अनेक कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
विशेष भावांजलि: अविनाश व्यास ने रंगा के परम मित्र और विख्यात गीतकार हरीश भादाणी की रचनाओं का वाचन कर उन्हें याद किया।
रंगकर्मी: विपिन पुरोहित, बी.एल. नवीन और सुरेश व्यास ने भी काव्यात्मक श्रद्धांजलि व्यक्त की।
पुष्पांजलि और आभार
कार्यक्रम के प्रारंभ में युवा संस्कृतिकर्मी प्रेम नारायण व्यास ने सभी का स्वागत किया। उपस्थित सभी अतिथियों और साहित्यकारों ने कीर्तिशेष रंगा के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का कुशल संचालन गिरीराज पारीक ने किया और अंत में राजेश रंगा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
