सुजानदेसर में बाबा रामदेवजी के मेले में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
सुजानदेसर में बाबा रामदेवजी के मेले में उमड़ा आस्था का जनसैलाब



- जम्मा-जागरण और भंडारों के साथ पूरे बीकानेर क्षेत्र में गूंजे जयकारे
बीकानेर, 21 सितम्बर । लोक देवता बाबा रामदेवजी की दशमी के अवसर पर सोमवार को बीकानेर शहर सहित ग्रामीण अंचल का संपूर्ण माहौल बाबा रामदेव मय नजर आया। तड़के चार बजे से शुरू हुआ दर्शन-वंदन का सिलसिला देर रात तक निर्बाध रूप से जारी रहा। सुजानदेसर स्थित ऐतिहासिक बाबा रामदेव मंदिर में विशाल मेले का आयोजन हुआ, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। यह मेला मंगलवार को भी जारी रहेगा।


300 से अधिक वर्षों का गौरवशाली इतिहास और राजा जोरावर सिंह की आस्था


संत हीरानंदजी एवं देवसी दासजी वंश पुजारी निजी प्रन्यास के पांचवीं पीढ़ी के सदस्य हरीराम कच्छावा ने मंदिर के ऐतिहासिक महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सुजानदेसर स्थित यह पावन धाम लगभग 350 वर्ष प्राचीन है।
309 वर्ष पूर्व का पर्चा: विक्रम संवत 1774 (309 वर्ष पूर्व) में संत हीरानंदजी एवं देवसी दासजी को बाबा रामदेवजी का पर्चा (अलौकिक अनुभव) प्राप्त हुआ था।
रियासतकालीन परंपरा
इसके पश्चात तत्कालीन बीकानेर रियासत के राजा जोरावर सिंह ने सुजानदेसर मंदिर में स्वयं आकर जात लगाई थी और भेंट अर्पित की थी। राजा ने लगभग एक सप्ताह तक बाबा रामदेवजी के भोग का महाप्रसाद ग्रामीणों में वितरित करवाया था, जो परंपरा आज भी जीवंत है।
तड़के 4 बजे से लगीं लंबी कतारें, मन्नत की बंधी मोळियां
देवसी दास कच्छावा (माली) की पांचवीं पीढ़ी के पुजारी किशन कच्छावा ने बताया कि तड़के चार बजे से ही बीकानेर शहर, गंगाशहर, भीनासर, किसमीदेसर, करमीसर, श्रीरामसर, नाल, नापासर तथा देशनोक सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया।
पैदल और वाहनों से पहुंचे श्रद्धालु
हाथों में पचरंगी ध्वजा थामे श्रद्धालु पैदल, ऊंटगाड़ों और निजी वाहनों से जयकारे लगाते हुए पहुंचे।
खेजड़ी में बांधी मोळी
श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेवजी, डाली बाई, संस्थापक संत हीरानंदजी, देवसी दासजी व उनके गुरु की प्रतिमाओं के दर्शन कर मंदिर परिसर स्थित प्राचीन खेजड़ी वृक्ष पर मन्नत की मोळी बांधी तथा परिक्रमा की।
मेले में मुख्य आकर्षण: मेला परिसर में खान-पान की विभिन्न स्टॉल, डोलर-चक्री झूले और प्रसाद की दुकानें सजी रहीं।
सेवा शिविरों में उमड़ा सेवाभाव, डीजे की धुन पर थिरके श्रद्धालु
नत्थूसर गेट के बाहर, श्रीरामसर, सुजानदेसर तथा गंगाशहर मार्ग पर विभिन्न सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा पैदल यात्रियों के लिए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए।
निःशुल्क व्यवस्थाएं
पदयात्रियों के लिए शीतल जल, शिकंजी, दही की लस्सी, गरम पकौड़ी और चाय की नि:शुल्क व्यवस्था की गई।
भजनों की स्वरलहरियां
सेवा स्थलों पर डीजे पर बाबा रामदेवजी के भजनों की गूंज रही, जिन पर श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते नजर आए।
सुरक्षा एवं व्यवस्था
सुजानदेसर में पुलिस प्रशासन के साथ प्रन्यास के प्रबन्धकों एवं स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं ने मुस्तैदी से व्यवस्था की कमान संभाले रखी।
सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा प्रतीक- हिंदू-मुस्लिम श्रद्धालुओं ने टेका माथा
बाबा रामदेवजी के प्रति जन-जन की अगाध श्रद्धा का प्रमाण यह रहा कि उन्हें जहां हिंदू समुदाय लोक देवता के रूप में पूजता है, वहीं मुस्लिम धर्मावलंबी ‘रामसा पीर’ के रूप में नमन करते हैं। सुजानदेसर सहित अनेक स्थानों पर मुस्लिम श्रद्धालुओं ने भी कतारबद्ध होकर समाधि व मंदिरों में शीश नवाया।
शहर भर के रामदेव मंदिरों में सजावट और महाभंडारे
सुजानदेसर के अतिरिक्त नाल स्थित ‘खेजड़ी वाले बाबा रामदेवजी मंदिर’ में भी मेले जैसा भव्य माहौल रहा। इसके साथ ही बीकानेर शहर के सर्राफा बाजार, सार्दुलगंज, मुक्ताप्रसाद-रामपुरा मार्ग, जस्सोलाई, भट्टोलाई, विश्वकर्मा गेट, चूनगरों का चौक, शीतला गेट, नोखा रोड, बंगलानगर, गंगाशहर बोथरा चौक तथा नत्थूसर गेट के अंदर स्थित रामदेवजी के मंदिरों में विशेष रोशनी व पुष्प सज्जा की गई।
आयोजन से जुड़े अंशुल तंवर ने बताया कि मुक्ताप्रसाद-रामपुरा मार्ग एवं जवाहर नगर में नवजीवन अस्पताल के पीछे स्थित मंदिरों में अखंड जोत एवं भव्य आरती के पश्चात विशाल भंडारे आयोजित किए गए, जिनमें हजारों श्रद्धालुओं ने बिना किसी भेदभाव के महाप्रसाद ग्रहण किया।
