ओलंपिक-2028 की तैयारी में में सात करोड़ की लागत से बनी अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज

ओलंपिक-2028 की तैयारी में में सात करोड़ की लागत से बनी अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026
  • सादुल क्लब में बनी देश की अनूठी अत्याधुनिक शूटिंग रेंज; इंग्लैंड से मंगाई गई 17 विशेष मशीनें, ओलंपिक स्तर के मानकों से लैस

बीकानेर, 23 अक्टूबर । खेल नगरी के रूप में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले बीकानेर में निशानेबाजी के खेल को एक नया और ऐतिहासिक आयाम मिलने जा रहा है। शहर के प्रतिष्ठित सादुल क्लब, बीकानेर ने लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज की स्थापना की है। इस हाई-टेक शूटिंग रेंज के शुरू होने से बीकानेर के युवा निशानेबाजों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और माहौल मिल सकेगा, जिससे वे आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतने की तैयारी कर सकेंगे।

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  • प्रेस वार्ता में दी गई विस्तृत जानकारी

क्लब के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ और सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने आयोजित प्रेस वार्ता में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस शूटिंग रेंज में ओलंपिक स्तर की मशीनें लगाई गई हैं और यहाँ वे सभी मापदंड अपनाए जा रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए अनिवार्य हैं। लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक-2028 में पदक जीतने के लिए निशानेबाजों को जो उन्नत तकनीक विदेशों में मिलती है, वह अब बीकानेर में ही उपलब्ध होगी। आयोजकों का दावा है कि इस स्तर की आधुनिक मशीनों से लैस सादुल क्लब की यह शूटिंग रेंज पूरे भारत में अपनी तरह की एकमात्र शूटिंग रेंज होगी।

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  • इंग्लैंड की प्रोमेटिक कंपनी की मशीनें और विदेशी इंजीनियरों की देखरेख

प्रेस वार्ता के दौरान युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने सिंगल ट्रैप और डबल ट्रैप का लाइव डेमो देकर उपस्थित सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। अधिकारियों ने बताया कि इस रेंज में कुल 17 अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जिनमें 15 ट्रैप स्पर्धा और 2 स्कीट स्पर्धा के लिए हैं। ये सभी मशीनें इंग्लैंड की प्रसिद्ध ‘प्रोमेटिक्स’ कंपनी से मंगवाई गई हैं। इन मशीनों को त्रुटिहीन तरीके से स्थापित करने के लिए इंग्लैंड से विशेष रूप से आए दो इंजीनियर केविन और जोस दिन-रात जुटे हुए हैं।

  • बीकानेर की ऐतिहासिक खेल विरासत को मिलेगा बढ़ावा

राठौड़ ने बीकानेर की गौरवशाली खेल परंपरा का स्मरण करते हुए बताया कि रियासतकालीन दौर में महाराजा करणी सिंह और उनकी पुत्री राजकुमारी राज्यश्री कुमारी ने देश का नाम रोशन किया था। डॉ. करणी सिंह को 1961 में और राज्यश्री कुमारी को 1969 में प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। इसके बाद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने ओलंपिक तथा अपूर्वी चंदेला ने राष्ट्रमंडल खेलों एवं विश्व कप में देश का मान बढ़ाया। इसी कड़ी में उभरते युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर भी बीकानेर का नाम ऊँचा कर रहे हैं।

क्लब का उद्देश्य है कि यहाँ के प्रतिभावान बच्चों को तकनीक या संसाधनों के अभाव का सामना न करना पड़े। इसके लिए देश के स्तरीय प्रशिक्षकों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर विदेशी कोचों की सेवाएं भी ली जाएंगी। नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी जल्द ही इस रेंज का गहन परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी करेंगे, जिसके बाद जिला प्रशासन की अनुमति से नियमित ट्रेनिंग शुरू कर दी जाएगी। अभ्यास के लिए क्लब की ओर से निशानेबाजों को कुछ बंदूकें भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

  • सादुल क्लब में पहले से मिल रही हैं कई खेल सुविधाएँ

सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने बताया कि सादुल क्लब में पहले से ही बास्केटबॉल, टेनिस, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, तीरंदाजी, क्रिकेट, पिकल बॉल, बैडमिंटन, बिलियर्ड्स और तैराकी जैसी खेल सुविधाएँ उपलब्ध हैं। वर्तमान में क्लब में प्रतिदिन औसतन 300 से 400 युवा अभ्यास करते हैं। अब इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज के जुड़ जाने से यहाँ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक हासिल कर सकेंगे। युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने भी खुशी जताते हुए कहा कि अब उन्हें विदेश जैसी सुविधाएँ अपने ही शहर बीकानेर में मिलेंगी।

प्रेस वार्ता के दौरान इंग्लैंड से आए इंजीनियर केविन व जोस के साथ-साथ सादुल क्लब की एक्जीक्यूटिव कार्यकारिणी के तमाम सदस्य भी उपस्थित रहे।

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