श्री जुबली नागरी भंडार के 119वें स्थापना दिवस पर सजी सांस्कृतिक शाम; राग बसंत और कथक की थपकी ने मोहा मन
श्री जुबली नागरी भंडार के 119वें स्थापना दिवस पर सजी सांस्कृतिक शाम


बीकानेर, 23 जनवरी। बीकानेर की साहित्य और संस्कृति की संवाहिका संस्था श्री जुबली नागरी भंडार के 119वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय ‘बासंतिक समारोह’ का समापन शुक्रवार को एक भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ। समारोह के अंतिम दिन संगीत, नृत्य और वादन की त्रिवेणी ने उपस्थित गणमान्यजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


इतिहास और कला का अनूठा संगम
कार्यक्रम के तीसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. प्रभा भार्गव, डॉ. पी.आर. भाटी, लियाकत अली और जेठाराम गहलोत उपस्थित रहे। अतिथियों ने नागरी भंडार के गौरवशाली 118 वर्षों के सफर और बीकानेर के बौद्धिक विकास में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ऐसी संस्थाएं ही शहर की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।


राग बसंत और हंसध्वनि से महका वातावरण
सांस्कृतिक संध्या का आगाज आनंद संगीत कला संस्था के विद्यार्थियों ने किया। संगीतज्ञ ज्ञानेश्वर सोनी के निर्देशन में कलाकारों ने राग बसंत पर आधारित वंदना गीत “जय जय जय है भगवती सुर भारती” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इसके बाद “आयो रे बसंत आयो रे” गीत के माध्यम से बसंत ऋतु का स्वागत किया गया, जिसे गीता सोनी, कोमल, खुशी और शिवानी ने सस्वर प्रस्तुत किया। वादन पक्ष में दीपक महात्मा ने बांसुरी पर राग हंसध्वनि की तान छेड़ी, जिस पर राहुल पारीक ने तबले से संगत की।
कथक और तबले की जुगलबंदी
नृत्य के क्षेत्र में अमित सारस्वत के निर्देशन में काशवी पंडित, तन्विका भारद्वाज और ऐश्वर्या ने कथक की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस दौरान तबले पर आदित्य सिंह और पखावज पर युवराज सिंह की लयबद्ध संगत ने नृत्य में चार चांद लगा दिए। वहीं, धीरज पुरोहित के निर्देशन में धीरज आचार्य, अजय पारीक, आयुष्मान और परम मारू ने सामूहिक तबला वादन से सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया।
भजन और सम्मान
एकल गायन सत्र में गिरिराज बागड़ी, नरेंद्र सोनी और विजयलक्ष्मी स्वामी ने भजनों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन अब्दुल शकूर सिसोदिया ने किया। आयोजन के अंत में नागरी भंडार के नन्दकिशोर सोलंकी ने कलाकारों और शहर के प्रतिष्ठित गणमान्य जनों का आभार प्रकट किया। 119वें स्थापना दिवस के इस समारोह ने बीकानेर की जीवंत कला परंपरा को एक बार फिर प्रमाणित किया।
