बीकानेर में चैत्र नवरात्रि का दिव्य उल्लास, जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी के सान्निध्य में गूँज रहे हैं वैदिक मंत्र
बीकानेर में चैत्र नवरात्रि का दिव्य उल्लास, जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी के सान्निध्य में गूँज रहे हैं वैदिक मंत्र


बीकानेर, 22 मार्च 2026 (रविवार)। बीकानेर के गंगाशहर मार्ग स्थित अग्रवाल भवन परिसर इन दिनों साक्षात् ‘शक्तिधाम’ में परिवर्तित हो गया है। तमिलनाडु के कृष्णगिरी स्थित सुप्रसिद्ध श्रीपार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ द्वारा आयोजित चैत्र नवरात्रि महोत्सव में श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है। शक्ति पीठाधीपति पूज्यपाद जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस ‘विराट कथा यज्ञ महोत्सव’ ने समूचे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया है।


15 अस्थायी मंदिरों का अलौकिक दैविक पांडाल
महोत्सव का मुख्य आकर्षण यहाँ सजाया गया स्वर्गतुल्य पांडाल है, जहाँ 15 अस्थायी मंदिरों में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और अतिदिव्य चमत्कारी सिद्ध शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। दर्शनार्थियों का मानना है कि इन प्रतिमाओं के दर्शन मात्र से कष्टों का निवारण हो रहा है। इसके साथ ही नौ कुंडीय महालक्ष्मी यज्ञ: अद्भुत यज्ञशाला में दुर्लभ वैदिक बीज मंत्रों के साथ भक्त अपनी सुख-समृद्धि हेतु आहुतियां दे रहे हैं।


पुण्य धन समृद्धि साधना: श्रद्धालु स्वयं अपने हाथों से ‘जीबू कॉइन’ और ‘पायरेट लक्ष्मी कुबेर यंत्र’ को सिद्ध कर रहे हैं।
भंडारा एवं कथा: प्रतिदिन शाम को विशाल निःशुल्क भंडारे के पश्चात रात्रि सत्र में जगद्गुरु के श्रीमुख से ‘श्रीमद् देवी भागवत महापुराण’ की अमृत वर्षा हो रही है।
मां कुष्मांडा की मुस्कान से हुई सृष्टि की रचना: जगद्गुरु
रविवार को भरणी नक्षत्र के शुभ संयोग पर कुष्मांडा माता की महिमा बताते हुए जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी ने कहा कि जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था, तब मां ने अपनी मंद मुस्कान से इस ब्रह्मांड की रचना की थी। उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा “भगवती मां के हृदय में जल रही अखंड ज्योति युगों-युगों से भक्तों की रक्षा कर रही है। मंदिर में या किसी संत के समक्ष हाथ जोड़ना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि इससे दिव्य ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है और विवेक जागृत होता है।” उन्होंने यह भी सीख दी कि कभी भी किसी धर्म या शास्त्र की निंदा न करें। यदि आप धर्म की रक्षा करेंगे, तो धर्म निश्चित रूप से आपकी रक्षा करेगा।
भजनों की स्वर लहरियों पर झूम उठे श्रद्धालु
प्रवचन के दौरान जब जगद्गुरु ने अपनी सुरीली आवाज में “मुझे रास आ गया है तेरे दर पर सर झुकाना…” और “जिधर देखता हूं मंदिर तुम्हारा…” जैसे भजन गाए, तो पूरा पांडाल तालियों की गूँज और ‘जय माता दी’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
ट्रस्टी डॉ. संकेश छाजेड़ ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं के लिए तीनों समय सात्विक और विविध व्यंजनों वाले भोजन प्रसाद की उत्तम व्यवस्था की गई है। इस पूरे आयोजन का सीधा प्रसारण जगद्गुरु के अधिकृत यूट्यूब चैनल ‘थॉट योगा’ पर विश्वभर में देखा जा रहा है।
