सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण अनिवार्य

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण अनिवार्य
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खमत खामणा
मुख्यमंत्री का स्वागत देशनोक आने पर
  • बीकानेर में विशाल जागरूकता कार्यशाला आयोजित

बीकानेर, 22 मार्च 2026 (रविवार)। महिलाओं में तेजी से बढ़ते सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के प्रति जागरूकता लाने के लिए आज सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। बीकानेर पीडियाट्रिक सोसायटी, एडोलसेंट हेल्थ अकादमी और लायंस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण और उससे बचाव के वैज्ञानिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की।

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भारत सरकार का पायलट प्रोजेक्ट: 1.25 करोड़ बालिकाओं का लक्ष्य
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जी.एस. तंवर ने बताया कि भारत में स्तन कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के तहत 14 वर्ष तक की 1.25 करोड़ किशोरियों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है।

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अब तक की प्रगति: देश में अब तक लगभग 3 लाख बालिकाओं को यह सुरक्षा कवच (वैक्सीन) दिया जा चुका है।

भयावह आंकड़े: भारत में हर साल लगभग 1.2 लाख महिलाएं इस कैंसर की चपेट में आती हैं, जिनमें से 80 हजार अपनी जान गंवा देती हैं।

टीकाकरण का सही समय और डोज
अतिरिक्त प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. रेखा आचार्य और प्रोफेसर डॉ. सारिका स्वामी ने वैक्सीन की उपयोगिता को स्पष्ट करते हुए बताया:

9 से 14 वर्ष: यह प्राथमिक आयु वर्ग है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इस उम्र में दो डोज (6 माह के अंतराल पर) पर्याप्त हैं।

15 से 26 वर्ष: इस आयु वर्ग में तीन डोज (0, 2 और 6 माह के अंतराल पर) की अनुशंसा की जाती है।

विशेष परिस्थिति: कमजोर प्रतिरोधक क्षमता (Immunocompromised) वाले व्यक्तियों के लिए तीन डोज अनिवार्य हैं।

समाज की भागीदारी और विशेषज्ञों का आह्वान
वरिष्ठ आचार्य डॉ. रेणु अग्रवाल और डॉ. श्याम अग्रवाल ने महिला संगठनों से अपील की कि वे इस संदेश को कच्ची बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाएं। लायंस क्लब की मधु खत्री ने समाज में इस टीके के प्रति व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में डॉ. कुलदीप सिंह बित्तू, डॉ. मुकेश बेनीवाल और डॉ. इंद्रा चौधरी सहित 40 से अधिक महिला प्रतिनिधियों और रेजिडेंट डॉक्टरों ने भाग लिया। कार्यक्रम का कुशल समन्वय डॉ. सौरभ पुरोहित द्वारा किया गया।

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