राजस्थान में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी, 5 मार्च से शुरू होगा अभियान; सरकारी स्कूलों और मदरसों के विद्यार्थियों को मिलेगी बड़ी राहत
राजस्थान में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण का शेड्यूल जारी


बीकानेर, 25 फरवरी। राजस्थान के सरकारी स्कूलों और मदरसों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण के दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार की इस योजना के तहत कक्षा 1 से 12वीं तक के पात्र विद्यार्थियों को 5 मार्च से किताबों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए दो चरणों में बांटने का निर्णय लिया है।


किसे मिलेंगी मुफ्त किताबें? पात्रता की शर्तें
सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार नि:शुल्क पुस्तकों का लाभ निम्नलिखित श्रेणियों को मिलेगा।
कक्षा 1 से 8: सभी छात्र-छात्राओं को शत-प्रतिशत मुफ्त पुस्तकें दी जाएंगी।
कक्षा 9 से 12: सभी छात्राएं, अनुसूचित जाति (SC) व जनजाति (ST) के छात्र और वे छात्र जिनके अभिभावक आयकरदाता (Non-Income Taxpayers) नहीं हैं, इस योजना के पात्र होंगे।


वितरण का टाइम-टेबल: दो चरणों में पहुंचेगी ज्ञान की रोशनी
शिक्षा निदेशालय ने जिलों के आधार पर वितरण को दो चरणों में प्रस्तावित किया है:
पहला चरण (5 मार्च से 25 मार्च): बीकानेर, जयपुर (शहर व ग्रामीण), जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, चूरू, नागौर सहित 12 जिलों में वितरण शुरू होगा।
दूसरा चरण (10 मार्च से 25 मार्च): हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, कोटा, सीकर, जैसलमेर और नवगठित जिलों (जैसे फलोदी, बालोतरा, डीडवाना) सहित शेष राजस्थान में वितरण किया जाएगा।
पुरानी और नई किताबों का फॉर्मूला: संसाधनों का होगा कुशल उपयोग
इस बार विभाग ने पुरानी पुस्तकों के पुन: उपयोग पर भी ध्यान दिया है:
कक्षा 1-5 व कक्षा 7: इन विद्यार्थियों को शत-प्रतिशत नई पुस्तकें प्रदान की जाएंगी।
कक्षा 6 व 8-12: इन कक्षाओं में 50% नई और 50% पुरानी (पुन: उपयोग योग्य) पुस्तकें वितरित की जाएंगी।
नई लॉन्च पुस्तकें: सत्र 2026-27 में लागू होने वाले नए सिलेबस की सभी पुस्तकें 100% नई दी जाएंगी।
शाला दर्पण पर होगी डिजिटल मॉनिटरिंग
पुस्तकों के वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसके लिए शाला दर्पण पोर्टल के ‘नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक मॉड्यूल’ में ऑनलाइन प्रविष्टि करना अनिवार्य कर दिया गया है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नोडल केंद्रों द्वारा निर्धारित तिथियों पर पुस्तकों की प्राप्ति न करना लापरवाही माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
