डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर श्री जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भव्य श्रद्धांजलि सभा

डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर श्री जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भव्य श्रद्धांजलि सभा
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खमत खामणा

बीकानेर , 6 दिसंबर । आज श्री जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बीकानेर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस पर एक अत्यंत गरिमापूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
संयुक्त आयोजन और उद्देश्य
आयोजक: राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), और स्काउट गाइड इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
उद्देश्य: छात्रों को बाबा साहब के संघर्ष, दर्शन और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ना।
श्रद्धांजलि: महाविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने बाबा साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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प्राचार्य और वक्ताओं के उद्बोधन
प्राचार्य का संबोधन: कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजेंद्र चौधरी ने डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। डॉ. चौधरी ने कहा, “आज हम उस महामानव को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने हमें संविधान के रूप में समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का सबसे बड़ा तोहफा दिया। बाबा साहब का जीवन ज्ञान की शक्ति का सबसे बड़ा प्रमाण है।”

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संकल्प: उन्होंने यह संकल्प लेने को प्रेरित किया कि सभी जाति और वर्ग के भेदों को समाप्त कर, उनके सपनों के न्यायपूर्ण और समतामूलक भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

NSS और स्काउट गाइड: NSS प्रभारी डॉ. सतपाल मेहरा और डॉ. भारती सांखला ने विद्यार्थियों को समाज सेवा के माध्यम से वंचितों के उत्थान और शिक्षा का प्रकाश फैलाने का आह्वान किया। स्काउट प्रभारी डॉ. के. के. खत्री ने अनुशासन और सेवा की भावना को डॉ. अंबेडकर के जीवन दर्शन का अभिन्न अंग बताया।

NCC की शपथ: NCC अधिकारी फरसा राम चौधरी ने NCC कैडेट्स को देश के संविधान की रक्षा और उसके मूल्यों को आत्मसात करने की शपथ दिलाई।

अन्य विचार: वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. रफी अहमद ने भारतीय अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण पर बाबा साहब के विचारों को स्पष्ट किया, जबकि डॉ. सुशील कुमार दैया ने भारतीय महिलाओं के कानूनी अधिकारों की स्थापना में डॉ. अंबेडकर की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. वंदना शुक्ला ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

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