साहित्यकारों का सम्मान समाज की प्राचीन परंपरा- श्याम महर्षि

साहित्यकारों का सम्मान समाज की प्राचीन परंपरा- श्याम महर्षि
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  • श्रीडूंगरगढ़ में कथाकार श्याम जांगिड़ को प्रदान किया गया ‘चुन्नीलाल सोमानी राजस्थानी कथा पुरस्कार’

बीकानेर/श्रीडूंगरगढ़, 15 मार्च । साहित्य और संस्कृति की सेवा करने वाले रचनाकारों का सम्मान ही समाज की जीवंतता का प्रतीक है। इसी भावना के साथ रविवार को श्रीडूंगरगढ़ के संस्कृति भवन प्रांगण में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रसिद्ध कथाकार श्याम जांगिड़ को ‘चुन्नीलाल सोमानी राजस्थानी कथा पुरस्कार’ से नवाजा गया।

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पुरस्कार और सम्मान
पुरस्कार के रूप में श्याम जांगिड़ को शॉल, श्रीफल और 31,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों और राजस्थानी कहानी में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने उनके लेखन को यथार्थ के बेहद करीब बताया।

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सरकारी संस्थाओं से अधिक समाज के पुरस्कार विश्वसनीय: श्याम महर्षि
समारोह को संबोधित करते हुए राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व अध्यक्ष श्याम महर्षि ने कहा, “साहित्यकारों को सम्मानित करने की परंपरा भारत में प्राचीन काल से है। सरकारी संस्थाओं की तुलना में समाज द्वारा दिए जाने वाले सम्मान अधिक विश्वसनीय और गरिमामयी होते हैं।”

राजस्थानी भाषा की मान्यता पर रोष और सुझाव
डॉ. हरिमोहन सारस्वत (मुख्य अतिथि): उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि राजस्थान के राजनेता और मुख्यमंत्री अपनी भाषा में बोलने से परहेज करते हैं। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे सरकारी दफ्तरों में बेझिझक राजस्थानी बोलें, ताकि अधिकारी भी इसे सीखने को मजबूर हों।

लक्ष्मीनारायण सोमानी (पुरस्कार प्रवर्तक): उन्होंने कहा कि राजस्थानी व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने में रहे, उसे अपने घर और व्यवहार की भाषा ‘मायड़ भाषा’ ही रखनी चाहिए।

डॉ. मदन सैनी: उन्होंने भाषा की उपेक्षा न करने और आधुनिक युग के साथ भाषा के स्वरूप को संवारने पर बल दिया।

प्रमुख घोषणा और सहभागिता
समारोह समिति के अध्यक्ष ताराचंद इंदौरिया ने आभार व्यक्त करते हुए भविष्य के लिए इस पुरस्कार राशि को बढ़ाकर 41,000 रुपये करने की महत्वपूर्ण घोषणा की।

कार्यक्रम का संचालन भगवती पारीक ‘मनु’ ने किया, जबकि संयोजन डॉ. चेतन स्वामी ने संभाला। समारोह में श्रीडूंगरगढ़ के प्रबुद्ध नागरिकों सहित पत्रकार तोलाराम मारू, शुभकरण पारीक, नारायण सारस्वत, राजेश शर्मा और अशोक पारीक का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर रवि पुरोहित, रामचंद्र राठी, बाबूलाल लखोटिया और समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

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