एनआरसीसी में आईएएस प्रशिक्षुओं का दौरा, ‘रेगिस्तान के जहाज’ को ‘डेयरी ऑफ द डेजर्ट’ बनाने की पहल को सराहा
एनआरसीसी में आईएएस प्रशिक्षुओं का दौरा,


बीकानेर, 16 मार्च । भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के प्रशिक्षु अधिकारियों के एक दल ने सोमवार को बीकानेर स्थित भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC) का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने ऊँटों के संरक्षण, नस्ल सुधार और संस्थान द्वारा विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक वैज्ञानिक शोध कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया।


ऊँटों की बदलती भूमिका: डेयरी और इको-टूरिज्म पर जोर
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए ऊँटों की पारंपरिक उपयोगिता घटने के बावजूद उनके नए आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान ऊँट को ‘डेयरी ऑफ द डेजर्ट’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है।


नवाचार: केन्द्र के वैज्ञानिकों ने ऊँटनी के दूध से दो दर्जन से अधिक स्वादिष्ट उत्पाद विकसित किए हैं।
अर्थव्यवस्था: ‘कैमल-बेस्ड इको-टूरिज्म’ के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
‘आई लव कैमल मिल्क’ अभियान और संग्रहालय भ्रमण
प्रशिक्षु अधिकारियों को केन्द्र के लोकप्रिय अभियान ‘आई लव कैमल मिल्क’ के बारे में जानकारी दी गई और उन्हें ऊँटनी के दूध से तैयार फ्लेवर्ड मिल्क का रसास्वादन भी कराया गया। दल ने उष्ट्र संग्रहालय, डेयरी इकाई और ऊँट बाड़ों का भ्रमण कर व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। युवा अधिकारियों ने ऊँट की सवारी का आनंद भी लिया और संस्थान के अनुसंधान कार्यों की प्रशंसा की।
प्रशासनिक तालमेल और समन्वय
इस भ्रमण कार्यक्रम के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की कार्यप्रणाली और नस्ल संरक्षण कार्यक्रमों पर व्याख्यान दिए। जिला प्रशासन की ओर से कार्यक्रम समन्वयक व तहसीलदार श्रीमती आकांक्षा गोदारा ने एनआरसीसी के सहयोग की सराहना की। केन्द्र के समन्वयक व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अखिल ठुकराल ने जिला कलेक्टर, बीकानेर और आईएएस अकादमी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. राकेश रंजन, डॉ. वेद प्रकाश और डॉ. राजेन्द्र कुमार चौधरी सहित संस्थान के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
