कविवर स्व गिरधारी सिंह पड़िहार की राजस्थानी पुस्तक ” जागती जोतां” एवं ” मानखो” का लोकार्पण

कविवर स्व गिरधारी सिंह पड़िहार की राजस्थानी पुस्तक " जागती जोतां" एवं " मानखो" का लोकार्पण
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बीकानेर , 6 अप्रैल । शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के तत्वावधान में कविवर स्व गिरधारी सिंह पड़िहार की राजस्थानी पुस्तक ” जागती जोतां” एवं ” मानखो” का लोकार्पण किया गया । महाराजा नरेन्द्रसिंह ऑडिटोरियम में आयोजित लोकार्पण समारोह में राजस्थानी भाषा साहित्य से युवा पीढ़ी को संस्कारित करने का आव्हान किया गया ।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समालोचक ओर भाषाविद डॉ उमाकांत गुप्त ने कहा कि स्व गिरधारी सिंह पड़िहार का साहित्य का मूल्यांकन हिन्दी और राजस्थानी की कालजयी रचनाओं के समान होना आवश्यक है । कार्यक्रम अध्यक्ष राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व सचिव पृथ्वीराज रतनू ने कहा कि स्व गिरधारी सिंह पड़िहार की पुस्तकों के तीसरे संस्करण का प्रकाशन उनके रचनाकर्म का सम्मान है ।

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विशिष्ठ अतिथि व्यंग्यकार डॉ अजय जोशी ने कहा कि स्व पड़िहार ने कालजयी रचनाओं का सृजन कर राजस्थानी भाषा साहित्य को समृद्ध किया है । विशिष्ट अतिथि कवि कथाकार राजेंद्र जोशी ने कहा कि लोकार्पित कृतियां राजस्थानी की अनमोल धरोहर है। कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखक अशफाक कादरी ने कहा कि स्व.पड़िहार की रचनाओं पर समग्र चर्चा होनी चाहिए। समाजसेवी गजेन्द्र सिंह सांखला ने राजस्थानी भाषा साहित्य से युवा पीढ़ी को जोड़ने का आव्हान किया । लोकार्पित कृतियों के प्रकाशक शिवपाल सिंह पड़िहार ने राजस्थानी भाषा मान्यता की आवश्यकता जताई ।

लोकार्पित पुस्तक मानखो पर पत्रवाचन करते हुए डॉ.गौरीशंकर प्रजापत ने कहा – मानखै मांया मानवता जगावतो – मानखो काव्य कवि गिरधारी सिंह पड़िहार नारी के चरित्र को नये रूप में प्रकट किया है। नारी ही नारी की रक्षा करने आगे आयी है।

“जागती जोता” पर पत्रवाचन करते हुए डॉ.कृष्णा आचार्य ने कहा कि राजस्थानी भाषा के दिग्गज वीररस के कवि स्व गिरधारी सिंह पडिहार का रचना संसार लंबा विस्तार लिए हुए है। उन्होंने कहा कि पडिहार ने साहित्य को नया मोड़ देते हुए धीरता, गंभीरता साहस ऊर्जा उत्साह से कलम चलाई ।

कार्यक्रम संयोजक कवि बाबूलाल छंगाणी ने लोकार्पित पुस्तकों का परिचय दिया। लोकगायक महेश सिंह बड़गुजर ने पुस्तक के गीत और सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम में चित्रकार योगेन्द्र पुरोहित, प्रेम नारायण व्यास, डॉ नमामी शंकर आचार्य, विजय सिंह शेखावत, सागर सिंह, प्रतीक सिंह, कृष्णलाल बिश्नोई, अमर सिंह खंगारोत, महेश उपाध्याय, गौरीशंकर सोनी, डॉ रितेश व्यास, इसरार हसन कादरी, डॉ नासिर जैदी, पवन प्यारे सोनी, भाविका कंवर चौहान, पुष्प कंवर, विनीता कंवर, शकूर बीकानवीं, तेजपाल सिंह, पवन कुमार चड्ढा ने अतिथियों का स्वागत किया। शब्दरंग के सचिव राजाराम स्वर्णकार ने आभार व्यक्त किया।

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