कोर्ट के स्थगन के बाद शिक्षकों को बड़ी राहत; अब बिना वसूली के पारित होंगे अटके हुए वेतन बिल
कोर्ट के स्थगन के बाद शिक्षकों को बड़ी राहत; अब बिना वसूली के पारित होंगे अटके हुए वेतन बिल


बीकानेर, 10 फ़रवरी । राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के कड़े संघर्ष और कानूनी पैरवी के बाद बीकानेर के उन सैकड़ों शिक्षकों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है, जिनके वेतन बिल ‘वसूली’ के विवाद के कारण पिछले लंबे समय से अटके हुए थे। माननीय न्यायालय द्वारा वसूली पर रोक (स्थगन) लगाए जाने के बाद अब कोष कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि संबंधित शिक्षकों के वेतन बिल बिना किसी आपत्ति के तुरंत पारित किए जाएंगे।


शिक्षकों की इस गंभीर समस्या को लेकर राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) का एक प्रतिनिधिमंडल बीकानेर कोष कार्यालय पहुंचा। जिला कोषाधिकारी की अनुपस्थिति में शिष्टमंडल ने वरिष्ठ लेखाधिकारी दयानिधि तिवारी से विस्तार से चर्चा की। वार्ता के दौरान यह सकारात्मक परिणाम सामने आया कि जयपुर मुख्यालय से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश प्राप्त हो चुके हैं। वरिष्ठ लेखाधिकारी ने आश्वस्त किया कि माननीय न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा और अब कोष कार्यालय स्तर पर वेतन बिलों को रोका नहीं जाएगा।


तकनीकी बाधाएं होंगी दूर, नियमित होगा वेतन
संगठन के जिलामंत्री नरेंद्र आचार्य ने बताया कि जिला कोषाधिकारी ने इस मामले को जयपुर स्तर पर उठाकर तकनीकी अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया था। वार्ता के दौरान यह तय हुआ कि जिन शिक्षकों के बिलों पर पूर्व में वसूली के नाम पर ‘ऑब्जेक्शन’ लगाए गए थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। वहीं, प्रदेश उपाध्यक्ष रवि आचार्य ने कहा कि कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद वसूली करना विधि विरुद्ध है। संगठन के प्रयासों से अब प्रदेश के शिक्षकों को आर्थिक और मानसिक संताप से मुक्ति मिलेगी।
शहरी-ग्रामीण वेतन व्यवस्था पर भी बनी सहमति
कोष एवं लेखा विभाग के अधिकारियों ने जयपुर में भी शहरी क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों का ग्रामीण क्षेत्र से वेतन आहरित करने की व्यवस्था को तर्कसंगत माना है। विभाग ने इस प्रक्रिया में आ रही तकनीकी बाधाओं को शीघ्र दूर करने का भरोसा दिलाया है। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान ललित मुझाल, वनीश मेहता, मोहम्मद रमजान और रामकुमार कासनियां सहित कई शिक्षक नेता उपस्थित रहे।
शिक्षक संघ ने सभी संबंधित शिक्षकों से अपील की है कि वे अपने आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) के माध्यम से अविलंब बिल प्रोसेस करवाएं ताकि समय पर उनके खातों में वेतन जमा हो सके। इस निर्णय से जिले के शिक्षा जगत में खुशी की लहर है और इसे संगठन की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
