बीकानेर में गहराया खेजड़ी बचाओ आंदोलन: संतों ने नकारा सरकार का प्रस्ताव, 363 शहीदों की तरह बलिदान देने की चेतावनी

बीकानेर में गहराया खेजड़ी बचाओ आंदोलन
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बीकानेर, 10 फरवरी । राजस्थान के बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहा महापड़ाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। कलेक्ट्रेट परिसर के सामने जारी इस आंदोलन में लगभग 500 पर्यावरण प्रेमी आमरण अनशन पर डटे हुए हैं, जिससे राज्य सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य मंत्री के.के. विश्नोई को वार्ता के लिए विशेष दूत बनाकर बीकानेर भेजा है, हालांकि फिलहाल आंदोलन खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रामगोपाल बिश्नोई ने स्पष्ट किया कि जयपुर भेजे गए संतों के दल ने वापस लौटकर सरकार के रुख से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि संभागीय आयुक्त के माध्यम से जारी होने वाले प्रस्तावित सरकारी आदेश को संतों ने सिरे से खारिज कर दिया है। संतों का मानना है कि सरकारी आदेशों में स्पष्टता की कमी है और जब तक धरातल पर खेजड़ी की कटाई पूरी तरह बंद नहीं होती, तब तक आंदोलन को विराम नहीं दिया जाएगा।

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“शहीद होने को तैयार, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे”
पर्यावरण प्रेमियों में सरकार के प्रति भारी रोष व्याप्त है। रामगोपाल बिश्नोई ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “आंदोलन जारी रहने के बावजूद प्रदेश में जगह-जगह खेजड़ी काटी जा रही है। हम सरकार की गंभीरता पर कैसे विश्वास करें? हमारी कमेटी ने निर्णय लिया है कि जब तक ठोस परिणाम नहीं निकलते, महापड़ाव जारी रहेगा।”

उन्होंने ऐतिहासिक खेजड़ली बलिदान का स्मरण कराते हुए कहा कि जिस तरह 363 बिश्नोई समाज के लोगों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए थे, यदि आज फिर वही इतिहास दोहराने की आवश्यकता पड़ी, तो बीकानेर में बैठा हर पर्यावरण प्रेमी बलिदान देने को तैयार है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी ‘मुकाम मेले’ से पहले बीकानेर में लाखों की संख्या में जनसैलाब उमड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी पूर्णतः शासन की होगी।

महिलाओं का अनूठा विरोध: कलश यात्रा और पौधे
इससे पूर्व, आंदोलन को और अधिक जनसहयोग प्राप्त हुआ जब बड़ी संख्या में महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। इस यात्रा की विशेषता यह थी कि महिलाओं ने कलश के साथ हाथों में खेजड़ी के पौधे ले रखे थे, जो प्रकृति के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शा रहा था। नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने संदेश दिया कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि थार की अस्मिता है।

फिलहाल, मंत्री के.के. विश्नोई और प्रशासन के बीच वार्ता के दौर जारी हैं। पूरे प्रदेश की नजरें अब बीकानेर पर टिकी हैं कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगें मानकर इस गतिरोध को खत्म कर पाएगी या आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।

 

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