शहीद शैलेंद्र सिंह को अंतिम विदाई, पत्नी का अदम्य साहस देख भीग गईं हजारों आंखें, 6 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि
शहीद शैलेंद्र सिंह को अंतिम विदाई


भिंड/अटेर, 24 जनवरी। “शहीद शैलेंद्र अमर रहें…” के गगनभेदी नारों के बीच शनिवार को मध्य प्रदेश के भिंड जिले के ग्राम चितावली में वो मंजर दिखा, जिसे देख फौलादी सीने भी पसीज गए। जम्मू के डोडा में सेना का वाहन खाई में गिरने से शहीद हुए हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का आज उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन इस गमगीन माहौल में शहीद की पत्नी शिवानी के अदम्य साहस ने शोक को गर्व में बदल दिया।


“रोना-धोना बंद करो”: वीरांगना का संदेश
जैसे ही शहीद शैलेंद्र का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। चारों ओर चीख-पुकार और आंसू थे। इस बीच, वीरांगना पत्नी शिवानी ने जो किया, उसने सबको स्तब्ध कर दिया। फूट-फूटकर रो रहे परिजनों और ग्रामीणों को ढांढस बंधाते हुए उन्होंने कहा, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा।” इसके बाद वे अपने पति के पार्थिव शरीर के पास बैठ गईं और दोनों हाथों से पति के गालों को चूमते हुए बार-बार उनकी बलाएं लेती रहीं। पत्नी का यह अटूट प्रेम और साहस देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक आईं।


6 साल के मासूम ने दी मुखाग्नि
शहादत के इस सफर का सबसे भावुक पल तब आया, जब शहीद के 6 वर्षीय मासूम बेटे भावेश भदौरिया ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। उसे शायद यह भी पूरी तरह आभास नहीं था कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे, लेकिन पिता की वर्दी और तिरंगे के प्रति उसका सम्मान देख उपस्थित जनसमूह रो पड़ा। डोडा हादसे में शैलेंद्र समेत सेना के 10 जवानों ने अपनी जान गंवाई थी, जिनमें से शैलेंद्र का बलिदान भिंड की माटी के लिए एक अमिट गौरव बन गया है।
सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान हुआ था हादसा
हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया जम्मू के डोडा जिले में एक सर्चिंग ऑपरेशन का हिस्सा थे। इसी दौरान सेना का वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। हादसे के बाद से ही पूरे भिंड जिले में शोक की लहर थी। आज अंतिम संस्कार के समय सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों ने शहीद को पुष्पांजलि अर्पित की।
