शिक्षा निदेशालय पर कल गूंजेगा मंत्रालयिक कर्मचारियों का आक्रोश, 17 मार्च को एक दिवसीय धरने का ऐलान
कमल नारायण आचार्य


बीकानेर, 15 मार्च । राजस्थान शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। संगठन ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 17 मार्च 2026 (मंगलवार) को शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के समक्ष एक दिवसीय सांकेतिक धरने की घोषणा की है। यह निर्णय शासन और प्रशासन द्वारा डीपीसी (DPC) और केडर रिव्यु जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई न करने के विरोध में लिया गया है।


क्यों हो रहा है विरोध?
शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने बताया कि 11 मार्च को निदेशक महोदय के साथ हुई वार्ता में सहमति बनी थी, लेकिन धरातल पर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं आए। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-


केडर रिव्यु और पदों की स्वीकृति: केडर रिव्यु के तहत स्वीकृत पदों की मदवार और कार्यालयवार सूचना अब तक IFMS पोर्टल पर अपडेट नहीं की गई है।
लंबित DPC: वर्ष 2017 से 2024-25 तक की रिव्यु/बकाया डीपीसी और 2025-26 की नियमित डीपीसी के लिए 15 मार्च की समयसीमा तय थी, जो बीत चुकी है। शासन स्तर पर संस्थापन और प्रशासनिक अधिकारियों की डीपीसी की तिथियां तय नहीं की गई हैं।
वरिष्ठता सूची का अभाव: अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारियों की डीपीसी के लिए आवश्यक 01.04.2025 की मिश्रित वरिष्ठता सूची अभी तक जारी नहीं हुई है।
निदेशालय के निर्देशों की कमी: कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक और वरिष्ठ सहायक से सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पदों पर पदोन्नति के लिए मंडल अधिकारियों को निदेशालय स्तर से स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
पुराने मामले: आरपीएससी (RPSC) 1986 बैच के लिपिकों की वरिष्ठता और 2018 भर्ती के कनिष्ठ सहायकों के ऑनलाइन काउंसलिंग से जुड़े मामले अभी भी अधर में लटके हैं।
आंदोलन की रूपरेखा
प्रदेशाध्यक्ष आचार्य ने स्पष्ट किया कि संगठन ने 6 मार्च को ही नोटिस के माध्यम से अपनी मांगों से अवगत करा दिया था। चूंकि 15 मार्च तक प्रशासन से कोई सकारात्मक सूचना प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कर्मचारी अब लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
तारीख: 17 मार्च 2026 (मंगलवार), स्थान: शिक्षा निदेशालय, बीकानेर, समय: प्रातः 11:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक
चेतावनी: यदि इसके बाद भी समाधान नहीं होता है, तो आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।
इस धरने में जिले भर से मंत्रालयिक संवर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़ी संख्या में जुटने की संभावना है।
