आशीर्वाद पार्सल से नहीं, सेवा-भक्ति से मिलता है, जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरीजी महाराज

आशीर्वाद पार्सल से नहीं, सेवा-भक्ति से मिलता है
mmtc 31 oct 2026
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026
  • रविवार को दादाबाड़ी आदिनाथ भवन में होगा अतिदिव्य ‘महामांगलिक’ का भव्य आयोजन

बीकानेर, 14 मार्च । कृष्णगिरी शक्ति पीठाधीपति जगद्गुरु आचार्य 1008 वसंत विजयानंद गिरीजी महाराज ने शनिवार को बीकानेर के श्रद्धालुओं को सेवा और भक्ति का मार्ग दिखाया। गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन में भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संसार की भौतिक वस्तुएं तो कूरियर या पार्सल से भेजी जा सकती हैं, लेकिन दैवीय आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए स्वयं को सेवा और भक्ति में समर्पित करना अनिवार्य है।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

रविवार रात्रि को होगा ‘चमत्कारी महामांगलिक’
कृष्णगिरी (तमिलनाडु) के श्री पार्श्वनाथ पद्मावती सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. संकेश जैन ने जानकारी दी कि जगद्गुरु के सानिध्य में 15 मार्च, रविवार को एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान होने जा रहा है।

pop ronak
bhikharam chandmal advertisment change 24 oct 2026

स्थान: गोगागेट सर्किल से स्टेशन रोड, माइको कंपनी के पास, एसबीआई बैंक के सामने स्थित श्री पार्श्वचंद्र सूरी गच्छ जैन दादाबाड़ी (बगीची), आदिनाथ भवन।
समय: रविवार रात्रि 8 बजे से।

विशेषता: यह आयोजन ‘सर्वबीज मंत्रयुक्त’ दिव्य महामांगलिक होगा, जिसे अत्यंत फलदायी और चमत्कारी माना जाता है। इसमें सकल जैन समाज और समस्त श्रद्धालुओं को सपरिवार आमंत्रित किया गया है।

काशी के विद्वानों ने संपन्न कराया महायज्ञ
शनिवार को अग्रवाल भवन में जगद्गुरु के पावन सानिध्य में विशेष महायज्ञ का आयोजन हुआ। इसमें काशी (वाराणसी) से आए प्रख्यात विद्वान विप्र पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दिलवाईं। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर रहा।

जगद्गुरु का संदेश: “क्षमता के अनुरूप करें कार्य”
अपने प्रेरणादाई प्रवचन में जगद्गुरु ने जीवन प्रबंधन के सूत्र भी साझा किए:

क्षमता का संतुलन: व्यक्ति को न तो अपनी क्षमता से अधिक कार्य का बोझ लेना चाहिए और न ही क्षमता से कम काम कर आलस्य करना चाहिए।

आशावादी धर्म: वर्तमान समय में धर्म के पुण्य को बढ़ाना अनिवार्य है। साधना शुद्ध और निःस्वार्थ होनी चाहिए।

आत्मा की शक्ति: मनुष्य को प्राणी मात्र के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। यदि साधक का मन शुद्ध है, तो संसार की कोई भी शक्ति उसे प्रभावित नहीं कर सकती। उन्होंने सदैव प्रसन्न रहने और माता-पिता व गुरुओं की सेवा करने का आह्वान किया।

 

adv change on 24 oct 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *