राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, बीकानेर का 37वां स्थापना दिवस समारोह

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, बीकानेर का 37वां स्थापना दिवस समारोह
mmtc 31 oct 2026
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026

बीकानेर, 30 सितंबर । राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (NRCE), बीकानेर ने आज अपना 37वां स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया। इस अवसर पर घोड़ों की रेस, हॉर्स शो, अश्व पालकों से चर्चा और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
केंद्र की विशिष्ट उपलब्धियां और अनुसंधान
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के प्रभागाध्यक्ष डॉ. एस. सी. मेहता ने कहा कि कम वैज्ञानिकों के होते हुए भी केंद्र ने पूरे राष्ट्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। उन्होंने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान, अश्व सीमन स्ट्रा, या भ्रूण प्रत्यारोपण के लिए पूरे देश को यहीं आना पड़ता है। केंद्र ने अपनी उपलब्धियों में कई ऊंचाइयों को हासिल किया है:

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

स्वदेशी एसएनपी चिप: केंद्र ने भारत की पहली स्वदेशी एसएनपी चिप (NBAGR, करनाल के साथ) विकसित की है।

pop ronak
bhikharam chandmal advertisment change 24 oct 2026

आठवीं अश्व नस्ल: केंद्र ने घोड़ों की आठवीं नस्ल देश को दी है।

पुरस्कार: इसे लगातार दो सालों तक राष्ट्रीय स्तर पर नस्ल संरक्षण पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

अनुसंधान: वर्तमान में केंद्र मेटरनल लिनिएज, अश्वों के होल जीनोम और मशीन लर्निंग पर कार्य कर रहा है, जिसके परिणाम शीघ्र ही सामने होंगे।डॉ. मेहता ने अश्व पालकों को स्वदेशी घोड़ों के खेलों को आगे बढ़ाने और बीकानेर में संगठन बनाने का सुझाव दिया।

मुख्य अतिथियों के विचार डॉ. जगदीश राणे (निदेशक, केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान): मुख्य अतिथि डॉ. राणे ने घोड़ों की नस्लों के संरक्षण की बात की और रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले जीनोम अध्ययन को आज की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि घोड़ा शक्ति, सौंदर्य और वफादारी का जीता-जागता प्रतीक है। उन्होंने उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए केंद्र की टीम को बधाई दीडॉ. अनिल कुमार पूनिया (निदेशक, राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र): विशिष्ट अतिथि डॉ. पूनिया ने घोड़े को साहस, धैर्य और अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने घोड़ों पर बने मुहावरे व लोकोक्तियों के उदाहरण दिए और कहा कि गिरती हुई संख्या को देखते हुए केंद्र के प्रयास उत्तम हैं तथा यह देश के समकक्ष केंद्रों में शिखर पर है।

कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियां
समारोह का मुख्य आकर्षण घोड़ों की रेस रही, जिसमें ऋतिक प्रथम और अजय द्वितीय स्थान पर रहे। हॉर्स शो के निर्णायक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश रंजन और श्री बाबूलाल मोहता रहे। सभी विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

पॉलिसी पेपर विमोचन: डॉ. मेहता और साथी वैज्ञानिकों द्वारा लिखित “स्वदेशी घोड़ों के लिए प्रजनन नीति” नामक पॉलिसी पेपर का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया।

प्रशिक्षण प्रमाण पत्र: तमिलनाडु से आए पशु चिकित्सा अधिकारियों को छह दिवसीय प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण पत्र भी दिए गए।

आयोजन सहयोग: केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. टी. आर. ताल्लुरी और डॉ. जितेन्द्र सिंह का विशिष्ट योगदान रहा। अश्व दौड़ के मुख्य निर्णायक डॉ. रमेश देदर थे। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री सुहैब मोहम्मद कुरैशी ने किया।

adv change on 24 oct 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *