बीकानेर में कुदरत का कहर- बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान; ईसबगोल और गेहूं की खेती चौपट
बीकानेर में कुदरत का कहर- बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान; ईसबगोल और गेहूं की खेती चौपट


बीकानेर, 21 मार्च । बीकानेर जिले में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। जिले के कई क्षेत्रों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, कुछ गांवों में 90 फीसदी तक खराबा हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है।


ईसबगोल, गेहूं और चना पर सबसे ज्यादा मार
बारिश और ओलावृष्टि का सबसे विनाशकारी असर ईसबगोल की फसल पर पड़ा है। विशेषकर पूगल क्षेत्र में ईसबगोल की खड़ी फसल पूरी तरह बिछ गई है। इसके अलावा:


नुकसान वाले क्षेत्र: श्रीडूंगरगढ़, लूणकरनसर, खाजूवाला और नोखा के अनेक गांवों में गेहूं और चने की फसलें प्रभावित हुई हैं।
कटी फसल की बर्बादी: जिन किसानों ने अपनी उपज काटकर खेतों में सुखाने के लिए छोड़ रखी थी, तेज बारिश ने उस अनाज को भी पूरी तरह भिगो दिया है, जिससे दाने काले पड़ने या अंकुरित होने का डर पैदा हो गया है।
कांग्रेस ने उठाई विशेष गिरदावरी और मुआवजे की मांग
फसलों की बर्बादी पर सियासत भी गरमा गई है। देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तुरंत विशेष गिरदावरी (फसल खराबे का सर्वे) शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हजारों किसान इस समय दाने-दाने को मोहताज होने की स्थिति में हैं, इसलिए बीमा कंपनियों को पाबंद कर क्लेम की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाया जाना चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी और सरकारी रुख
सियाग ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने जल्द सर्वे करवाकर उचित मुआवजा घोषित नहीं किया, तो कांग्रेस किसानों के हक के लिए उग्र आंदोलन करेगी। दूसरी ओर, कृषि विभाग ने अभी तक खराबे का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फील्ड रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके बाद ही नुकसान का वास्तविक प्रतिशत सामने आ पाएगा।
