पीबीएम अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही युवक की मौत
पीबीएम अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही युवक की मौत



- परिजनों का मोर्चरी के बाहर धरना
बीकानेर, 12 मार्च । बीकानेर के सबसे बड़े पीबीएम (PBM) अस्पताल में उपचार के दौरान एक युवक की मौत के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया है। परिजनों ने चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव लेने से इनकार कर दिया है और मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।


इलाज के बजाय विभागों के बीच ‘फुटबॉल’ बना रहा मरीज
घटनाक्रम के अनुसार, सुभाषपुरा निवासी भरत (पुत्र राजेंद्र राणा) को बुधवार रात पेट में तेज दर्द होने पर पीबीएम की पुरानी कैजुअल्टी लाया गया था। डॉक्टरों ने उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया, जहाँ से उसे यूरोलॉजी विभाग भेज दिया गया। परिजनों का हृदयविदारक आरोप है कि मरीज को ट्रॉमा सेंटर से यूरोलॉजी और फिर वहाँ से आर्य अस्पताल भेजा गया। आर्य अस्पताल से बिना इलाज उसे पुनः ट्रॉमा सेंटर भेज दिया गया। कई घंटों तक विभागों के बीच इधर-उधर चक्कर कटवाने के कारण भरत की हालत बिगड़ती गई और अंततः ट्रॉमा सेंटर में उसने दम तोड़ दिया।


परिवार का इकलौता चिराग बुझा
मृतक भरत जयपुर की एक निजी कंपनी में कार्यरत था और अपने बुजुर्ग पिता का एकमात्र सहारा था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और पूरे घर की जिम्मेदारी भरत के कंधों पर ही थी। उसकी असमय मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मोर्चरी पर प्रदर्शन, पुलिस और नेताओं की मौजूदगी
घटना की सूचना मिलते ही भाजपा नेता श्याम सिंह हाडला मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को समर्थन देते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। वर्तमान में परिजन मोर्चरी के बाहर धरने पर डटे हैं। उनकी स्पष्ट मांग है कि इलाज में देरी और लापरवाही बरतने वाले दोषी चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। पीड़ित परिवार को उचित न्याय और मुआवजा मिले। स्थिति को देखते हुए सदर थाना पुलिस भारी जाब्ते के साथ मौके पर तैनात है और परिजनों से समझाइश का प्रयास कर रही है, हालांकि परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
जांच और कार्रवाई की वर्तमान स्थिति
भरत राणा की मृत्यु के बाद उपजे जनाक्रोश और परिजनों के धरने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। वर्तमान अपडेट्स के अनुसार
अस्पताल प्रशासन द्वारा उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन
पीबीएम अस्पताल अधीक्षक और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी का गठन किया है।
जांच का मुख्य बिंदु: कमेटी इस बात की जांच कर रही है कि मरीज को कैजुअल्टी से यूरोलॉजी और फिर आर्य अस्पताल भेजने के दौरान क्या चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया? क्या मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे समय पर उपचार मिला या केवल ‘रेफर’ करने में समय गंवाया गया?
रिपोर्ट की समयसीमा: कमेटी को 48 घंटों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि यदि किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही (Medical Negligence) सिद्ध होती है, तो संबंधित रेजिडेंट या फैकल्टी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस कार्रवाई और एफआईआर (FIR) की स्थिति
मृतक के परिजनों ने सदर थाना बीकानेर में अस्पताल के संबंधित ड्यूटी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही से मौत (धारा 304A IPC) की शिकायत दी है।
एफआईआर दर्ज: पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के सटीक कारणों और लापरवाही की पुष्टि के लिए ‘मेडिकल बोर्ड’ द्वारा किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
समझाइश के बाद धरना समाप्त: प्रशासन द्वारा जांच के लिखित आश्वासन और पोस्टमार्टम बोर्ड गठित करने की सहमति के बाद परिजनों ने फिलहाल धरना स्थगित कर दिया है, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को बचाया गया तो आंदोलन पुनः शुरू किया जाएगा।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
बीजेपी नेता श्याम सिंह हाडला सहित कई स्थानीय संगठनों ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सहायता प्रदान करने की मांग प्रशासन के सामने रखी है।
