जुलाई से नया कानून, बदलेंगी धाराएं, संगोष्ठी के लिए मास्टर ट्रेनर नियुक्त

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  • नए कानून लागू होने से त्वरित गति से हो सकेगा आपराधिक मामलों का निस्तारण
  • ऑनलाईन एफआईआर की सुविधा शुरू, आईपीसी की धारा 302 अब बीएनएस 101

चूरू, 25 जून। एक जुलाई 2024 से लागू हो रही नवीन विधियों की जानकारी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं आमजन को उपलब्ध करवाए जाने हेतु जिला स्तर पर जिला परिषद सभागार में 27 जून को दोपहर 3 बजे संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।

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अभियोजन विभाग के उप निदेशक दिलावर सिंह ने बताया कि जिला स्तर पर गोरधन सिंह, अभियोजन अधिकारी को मास्टर ट्रेनर नियुक्त किया गया है। सभी उपखण्ड स्तर पर होने वाली संगोष्ठियों के लिए सरदारशहर में नरेश सिंह कविया, रतनगढ़ में कुलदीप सिंह, राजगढ़ में नजीर अहमद सिद्दीकी, सुजानगढ़ में महेश कुमार, बीदासर में धीरज तिवाड़ी तथा तारानगर में विनोद बेनिवाल को मास्टर ट्रेनर नियुक्त किया गया है।

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उपनिदेशक ने बताया कि प्रदेश में 01 जुलाई 2024 से भारतीय दण्ड संहिता 1860 के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के स्थान पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 तथा भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 लागू की जा रही है। इनमें पूर्व में लागू अधिनियम को विलोपित नहीं कर नये अधिनियम को पुर्नस्थापित किया गया है।

नवीन विधियों में जो मुख्यतः प्रावधान जोड़े गए हैं उनमें अपराधों के अनुसंधान व सम्मन/वारण्ट की तामील में इलेक्ट्रोनिक संचार साधनों को उपयोग में लेना, विधि विज्ञान का अधिकतम उपयोग, समयबद्ध अनुसंधान, विचारण एवं निर्णय सुनाने के लिए समय सीमा तय की गई है। पीड़ित को प्रथम सूचना की प्रति देना तथा अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट से सूचित किए जाने का प्रावधान भी किया गया है।

दोनों ही प्रावधान डिजिटल माध्यम से काम में लिए जा सकते हैं। 7 वर्ष या उससे अधिक सजा के दण्डनीय अपराधों के प्रकरणों को संबंधित सरकार द्वारा ही न्यायालय से वापस करने पर पीड़ित पक्ष को सुना जाना आवश्यक किया गया है। छोटे व कम गंभीर प्रकृति के अपराधों का संक्षिप्त विचारण किए जाने का आज्ञापक प्रावधान किया गया है। अभियुक्त व्यक्ति की इलेक्ट्रॉनिक साधनों से जांच विचारण किए जाने का प्रावधान किया गया है।

 

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