पुनर्भरण नहीं तो प्री-प्राइमरी में प्रवेश नहीं, शिक्षा विभाग को 10 दिन का अल्टीमेटम

पुनर्भरण नहीं तो प्री-प्राइमरी में प्रवेश नहीं, शिक्षा विभाग को 10 दिन का अल्टीमेटम
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quicjZaps 15 sept 2025
  • निजी स्कूलों की आरपार की जंग

बीकानेर, 21 मार्च । राजस्थान के निजी स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीकानेर के ‘आनंद निकेतन’ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेशभर के निजी शिक्षण संस्थानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि सत्र 2026-27 के लिए आरटीई (RTE) के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं (PP-3, PP-4 और PP-5) में तब तक प्रवेश नहीं दिए जाएंगे, जब तक सरकार इनके पुनर्भरण (Payment) के स्पष्ट प्रावधान जारी नहीं कर देती।

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पैपा (PAIPA) के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल की अगुवाई में हुई बैठक

“भुगतान नहीं तो प्रवेश नहीं” का शंखनाद
पैपा (PAIPA) के प्रदेश समन्वयक गिरिराज खैरीवाल की अगुवाई में हुई इस बैठक में संचालकों ने “हठधर्मी” रवैये के खिलाफ कड़ा रोष जताया। खैरीवाल ने बताया कि 17 मार्च को ही शिक्षा निदेशक को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर प्री-प्राइमरी कक्षाओं के भुगतान हेतु दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए, तो राज्य का एक भी निजी स्कूल इन कक्षाओं में आरटीई प्रवेश प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगा।

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हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप
बैठक में चर्चा के दौरान बताया गया कि माननीय उच्च न्यायालय ने 8 जनवरी 2026 को अपने फैसले में स्पष्ट रूप से प्री-प्राइमरी कक्षाओं के पुनर्भरण के आदेश दिए थे। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग भुगतान से बचने के लिए मौन साधे हुए है। संचालकों का कहना है कि वर्तमान सत्र 2025-26 के साथ-साथ पिछले कई वर्षों का आरटीई भुगतान भी लंबित है, जिससे स्कूलों का आर्थिक ढांचा चरमरा गया है।

एकजुटता और संघर्ष का संकल्प
बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अभय सिंह टाक ने सभी संचालकों से एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाग को दी गई मियाद खत्म होते ही विरोध की रणनीति को और उग्र बनाया जाएगा। विजयसिंह शेखावत ने एकता पर जोर देते हुए सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर तरविन्दर सिंह कपूर, रविकांत पुरोहित, सौरभ बजाज, और प्रताप सिंह भाटी सहित बीकानेर के दर्जनों प्रमुख स्कूल संचालक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में पुष्टि की कि बिना आर्थिक प्रावधानों के निशुल्क शिक्षा का भार वहन करना अब संभव नहीं है।

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