अनगिनत अंबाएँ’ नारी संवेदना की उत्तर-आधुनिक नाट्य कृति, नागरी भंडार में भव्य लोकार्पण

अनगिनत अंबाएँ' नारी संवेदना की उत्तर-आधुनिक नाट्य कृति, नागरी भंडार में भव्य लोकार्पण
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खमत खामणा

बीकानेर, 27 मार्च 2026। स्थानीय नागरी भंडार स्थित सुदर्शन कला दीर्घा में शुक्रवार को प्रज्ञालय संस्थान के तत्वावधान में एक गरिमामय साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा की साहित्य अकादेमी पुरस्कृत कृति ‘अलेखूं अंबा’ के हिंदी अनुवाद ‘अनगिनत अंबाएँ’ का भव्य लोकार्पण हुआ। केंद्रीय साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस कृति का अनुवाद सुप्रसिद्ध साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने किया है।

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अनुवाद: मूल सृजन से बड़ी चुनौती
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी और पत्रकार मधु आचार्य ने कहा कि ‘अनगिनत अंबाएँ’ राजस्थानी साहित्य की एक उत्तर-आधुनिक नाट्य कृति है। उन्होंने रेखांकित किया कि पौराणिक कथानक होने के बावजूद यह नाटक समकालीन संदर्भों में नारी की पीड़ा और संवेदना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। उन्होंने मालचंद तिवाड़ी के अनुवाद कर्म की सराहना करते हुए कहा कि मूल कृति की आत्मा को अक्षुण्ण रखते हुए दूसरी भाषा में ढालना एक कठिन और अनुपम उदाहरण है।

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सृजनात्मक परिश्रम का प्रतिफल
अनुवादक मालचंद तिवाड़ी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अनुवाद को अक्सर दोयम दर्जे का लेखन माना जाता है, जबकि यह मौलिक सृजन से कहीं अधिक जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने बताया कि ‘अलेखूं अंबा’ का शीर्षक ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती था, जिसे हिंदी में ‘अनगिनत अंबाएँ’ के रूप में रूपांतरित कर महाभारत के विभिन्न पर्वों की नई दृष्टि को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है।

साहित्यिक चर्चा और गरिमामय उपस्थिति
मूल कृति के रचनाकार कमल रंगा ने अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पौराणिक पात्रों के माध्यम से आधुनिक बोध को पिरोना एक सृजनात्मक उपक्रम रहा है। वरिष्ठ साहित्यकार शंकरसिंह राजपुरोहित और युवा लेखक विप्लव व्यास ने भी कृति पर अपनी आलोचनात्मक टिप्पणी रखते हुए इसे हिंदी जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

समारोह का प्रारंभ युवा कवि गिरिराज पारीक के स्वागत संबोधन और पुस्तक परिचय से हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन वरिष्ठ शायर कासिम बीकानेरी ने किया और अंत में नगेन्द्र किराडू ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शहर के प्रबुद्ध साहित्यकार, रंगकर्मी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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