दिल से हंसो’ कार्यक्रम में गूंजे ठहाके; रचनाकारों ने अप्रैल फूल पर छोड़ीं हंसी की फुलझड़ियाँ
दिल से हंसो' कार्यक्रम में गूंजे ठहाके; रचनाकारों ने अप्रैल फूल पर छोड़ीं हंसी की फुलझड़ियाँ


बीकानेर, 2 अप्रैल 2026। शहर के रचनाकारों ने बुधवार, 1 अप्रैल को ‘अप्रैल फूल दिवस’ के अवसर पर अंबेडकर सर्किल स्थित हर्ष निवास में हंसी-मजाक से ओत-प्रोत कार्यक्रम “दिल से हंसो” का भव्य आयोजन किया। नवकिरण सृजन मंच के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने अपने सफलता के 9वें वर्ष में प्रवेश किया, जहाँ कवियों और साहित्यकारों ने अपनी चुटीली रचनाओं से श्रोताओं को लोट-पोट कर दिया।


हंसी ही है सबसे बड़ी औषधि
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. एस.एन. हर्ष ने स्वास्थ्य और हास्य के अंतर्संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 24 घंटे में मात्र 10 मिनट खुलकर हंसने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ती है, जिससे व्यक्ति तनावमुक्त और स्वस्थ रहता है। मुख्य अतिथि वरिष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि गौरीशंकर मधुकर ने अपने विशिष्ट अंदाज में छोटी-छोटी रचनाओं के जरिए जीवन की विसंगतियों पर करारा प्रहार किया और सामाजिक परिवेश में खुश रहने के गुर सिखाए। विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद डॉ. अभयसिंह टॉक ने भी हास्य के गुणों की ओर ध्यान आकर्षित किया।


कविताओं के जरिए गुदगुदाया
कार्यक्रम का श्रीगणेश ज्योति वधवा ‘रंजना’ ने सरस्वती वंदना से किया और अपनी रचना ‘डस्टबीन’ सुनाकर तालियां बटोरीं। अन्य प्रमुख प्रस्तुतियां इस प्रकार रहीं।
राजेन्द्र स्वर्णकार: ‘कुकडू कुडूड कू’ रचना के जरिए मुर्गे और मुर्गी के संवाद से सबको हंसाया।
मनीषा आर्य सोनी: एक मेहनतकश इंसान की तुलना गर्दभ (गधे) से करते हुए मार्मिक और हास्य व्यंग्य प्रस्तुत किया।
राजाराम स्वर्णकार: “नई-नई स्कूटी थी, पीछे बैठी ब्यूटी थी” सुनाकर महफिल में ठहाके लगवाए।
डॉ. कृष्णा आचार्य: “बलम म्हारो चतर हुयो, मोबाइल सूं बात करे” के जरिए आधुनिक दौर पर चुटकी ली।
सांस्कृतिक सार्थकता और संदेश
सांस्कृतिक कर्मी राजेन्द्र जोशी ने कवियों की रचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज की आपा-धापी वाली जिंदगी में लोगों के पास हंसने की फुर्सत नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि मजाक और ‘प्रैंक’ ऐसे होने चाहिए जिनसे किसी का दिल न दुखे। डॉ. कृष्णा आचार्य ने रचनाओं को हास्य के साथ गंभीर और संदेशपरक बताया। नवकिरण सृजन मंच के अध्यक्ष डॉ. अजय जोशी ने स्वागत उद्बोधन में अप्रैल फूल डे की परंपरा और कार्यक्रम के 9 वर्षों के सफर पर प्रकाश डाला।
उपस्थिति और संचालन
कार्यक्रम का शानदार और ऊर्जावान संचालन बाबू बमचकरी ने हास्य की फुलझड़ियां छोड़ते हुए किया। इस अवसर पर कैलाश टॉक, पम्मी कोचर, डॉ. नासिर जैदी, डॉ. बसन्ती हर्ष, वरिष्ठ रंगकर्मी बी.एल. नवीन, कथाकार डॉ. अशफाक कादरी, विजय कोचर और ऋषिकुमार अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। अंत में यामिनी जोशी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
