

विदा होकर भी रोशनी की उम्मीद दे गईं विमला मेहरा


बीकानेर, 6 नवम्बर । जीवन के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला बिखेरने की अनूठी मिसाल पेश करते हुए श्रीमती विमला मेहरा का मरणोपरांत नेत्रदान किया गया। सिद्धार्थ मेहरा की धर्मपत्नी विमला मेहरा के निधन के बाद उनके परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा और संकल्प का सम्मान करते हुए पीबीएम अस्पताल में नेत्रदान करवाया।



परिवार ने पूरा किया नेत्रदान का संकल्प
पीबीएम अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. सीताराम गोठवाल ने जानकारी दी कि विमला मेहरा ने अपने जीवनकाल में ही नेत्रदान करने की इच्छा जताई थी। उनके निधन के बाद गहरे दुःख के बीच परिवार ने इस संकल्प को पूरा करने का दृढ़ निर्णय लिया। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के विज्ञान विभाग से संबद्ध पटेल नेत्र कोष के स्वीकृति पत्र पर उनकी बड़ी पुत्री डॉ. मनीषा मेहरा ने माता के नेत्रदान की सहमति प्रदान की। इस संवेदनशील निर्णय से अब जरूरतमंदों के जीवन में दृष्टि की नई उम्मीद जगी है।
बीकानेर से रहा है गहरा रिश्ता
मूल रूप से चिड़ावा (झुंझुनूं) निवासी विमला मेहरा का बीकानेर से गहरा पारिवारिक और शैक्षणिक जुड़ाव रहा है। उनके मामा डॉ. सीताराम गोठवाल पीबीएम अस्पताल के पूर्व अधीक्षक तथा सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी बड़ी पुत्री डॉ. मनीषा मेहरा बीकानेर स्थित राजुवास (RAJUVAS) कॉलेज में प्रोफेसर हैं, जबकि उनके दामाद डॉ. ओमप्रकाश सिंह एस.पी. मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा उनकी छोटी पुत्री डॉ. शशि मेहरा सीकर तथा दामाद डॉ. सुरेंद्र कुमार कुचामन में कार्यरत हैं।
दुखों के पहाड़ के बावजूद मानवता के प्रति समर्पण
यह परिवार करीब दस वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में अपने युवा पुत्र इंजीनियर शिवनाथ मेहरा को खो चुका है। परिवार पर आए इस गहरे और असहनीय आघात के बावजूद, विमला मेहरा के नेत्रदान के संकल्प को पूरा करने का परिजनों का यह निर्णय मानवीय संवेदनाओं, समाज के प्रति जिम्मेदारी और सर्वोच्च सेवा भाव का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।,

