21 फरवरी को बीकानेर कलेक्ट्रेट पर हुंकार भरेगी राजस्थानी मोटियार परिषद
21 फरवरी को बीकानेर कलेक्ट्रेट पर हुंकार भरेगी राजस्थानी मोटियार परिषद


- मायड़ भाषा के मान की लड़ाई
बीकानेर, 8 फ़रवरी । विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने वाली है। राजस्थानी मोटियार परिषद ने ऐलान किया है कि आगामी 21 फरवरी को बीकानेर कलेक्ट्रेट परिसर में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल न करने और राज्य सरकार द्वारा इसे राजभाषा का दर्जा देने में हो रही देरी के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।


धरने की तैयारियों को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में परिषद के पदाधिकारियों ने अपनी रणनीति साझा की। डॉ. हरिराम विश्नोई ने कहा कि राजस्थानी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक विरासत और पहचान है। अत्यंत समृद्ध और प्राचीन होने के बावजूद सरकारों द्वारा इसकी निरंतर उपेक्षा की जा रही है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


संवैधानिक हक तक जारी रहेगा संघर्ष
बैठक के दौरान कोषाध्यक्ष राजेश चौधरी ने स्पष्ट किया कि राजस्थानी भाषा को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “जब तक हमारी मातृभाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं मिल जाती, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।” 21 फरवरी को होने वाले इस प्रदर्शन में बीकानेर संभाग के हजारों भाषा प्रेमी, साहित्यकार, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता जुटेंगे।
प्रमुख हस्तियों की रही उपस्थिति
बैठक में डॉ. गौरी शंकर प्रजापत, डॉ. नमामि शंकर आचार्य, भरत दान, और प्रशांत जैन सहित कई प्रबुद्धजनों ने भाग लिया। राम अवतार उपाध्याय, कमल किशोर मारू और अन्य सदस्यों ने भी प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए जनसंपर्क तेज करने पर जोर दिया। पदाधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि वे अपनी मातृभाषा के गौरव के लिए अधिक से अधिक संख्या में कलेक्ट्रेट पहुँचें।
