हंसाने वाला रुला गया, सड़क हादसे में राजस्थान के प्रख्यात हास्य कवि केसर देव मारवाड़ी का निधन

हंसाने वाला रुला गया, सड़क हादसे में राजस्थान के प्रख्यात हास्य कवि केसर देव मारवाड़ी का निधन
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quicjZaps 15 sept 2025

जयपुर/रींगस, 10 फ़रवरी । अपनी अनूठी मारवाड़ी शैली और तीखे कटाक्षों से करोड़ों लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरने वाले राजस्थान के लाडले हास्य कवि केसर देव मारवाड़ी अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार देर रात सीकर जिले के रींगस कस्बे में हुए एक भीषण सड़क हादसे में उनका दुखद निधन हो गया। इस खबर के बाद साहित्य जगत, शिक्षा क्षेत्र और उनके लाखों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

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हादसा सोमवार-मंगलवार की मध्यरात्रि करीब 2:00 बजे रींगस के मिल तिराहे के पास हुआ। मिली जानकारी के अनुसार, केसर देव मारवाड़ी अपनी पत्नी चंदा प्रजापत के साथ एक शादी समारोह में शिरकत कर वापस जयपुर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी कार सड़क किनारे खड़े एक ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि केसर देव की मौके पर ही मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि चालक को नींद की झपकी आने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। हादसे में उनकी पत्नी को मामूली चोटें आई हैं।

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शिक्षण और साहित्य का अनूठा संगम
नागौर जिले के लाडनूं स्थित ‘कुम्हारों का बास’ के मूल निवासी केसर देव मारवाड़ी केवल एक कवि ही नहीं, बल्कि एक समर्पित सरकारी शिक्षक भी थे। वर्तमान में वे जयपुर के झोटवाड़ा स्थित एक सरकारी स्कूल में कार्यरत थे। छह भाइयों में तीसरे नंबर पर रहने वाले केसर देव अपने मिलनसार स्वभाव के कारण परिवार और समाज के लाडले थे। उनकी पहली पोस्टिंग नागौर के विश्वनाथपुरा में हुई थी, जिसके बाद वे लंबे समय से जयपुर में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे थे।

मारवाड़ी संस्कृति के ध्वजवाहक
केसर देव मारवाड़ी ने अपनी कविताओं के जरिए मारवाड़ी संस्कृति और ग्रामीण परिवेश को राष्ट्रीय मंचों पर एक नई पहचान दी। उनकी मंचीय प्रस्तुतियां इतनी सजीव होती थीं कि दर्शक घंटों तक ठहाके लगाने को मजबूर हो जाते थे। वे अपनी कविताओं में सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार करने के साथ-साथ रिश्तों की अहमियत को बड़े सरल अंदाज में पिरोते थे। सोशल मीडिया पर भी उनकी कविताओं के वीडियो लाखों की संख्या में देखे जाते थे।

साहित्यिक जगत के दिग्गजों और राजनीतिक हस्तियों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। उनके निधन से मारवाड़ी कविता का वह स्वर शांत हो गया है, जो बिना किसी बनावट के सीधे आम आदमी के दिल तक पहुंचता था।

 

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