शिक्षा निदेशालय में ऑडिट अनुभाग (ICP) बंद करने की सुगबुगाहट; कर्मचारी संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी, सरकार को लिखा पत्र
कमल नारायण आचार्य


बीकानेर, 21 जनवरी । माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने वाले आंतरिक जांच अनुभाग (ऑडिट आईसीपी) को बंद करने के कथित प्रयासों ने तूल पकड़ लिया है। ‘शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान’ ने इन कोशिशों का पुरजोर विरोध करते हुए इसे विभागीय हितों के खिलाफ बताया है। संघ ने न केवल इसे चालू रखने बल्कि जांच दलों का गठन कर कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग की है।


वित्तीय अनुशासन के लिए खतरा: कमल नारायण आचार्य


शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने इस संबंध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव सहित उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा है। आचार्य ने तर्क दिया कि ऑडिट आईसीपी अनुभाग शालाओं और कार्यालयों में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाता है। आंतरिक जांच दलों द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के आधार पर ही निदेशालय स्तर पर सुधार और अनुपालना सुनिश्चित की जाती है। यदि इस अनुभाग को बंद किया गया, तो विभाग में वित्तीय अराजकता फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।
वित्त विभाग के निर्देशों का हवाला
संघ ने अपने पत्र में शासन सचिव वित्त (व्यय) अंकेक्षण अनुभाग द्वारा हाल ही में जारी परिपत्र (दिनांक 16.01.2026) का हवाला दिया है। इस परिपत्र में स्पष्ट रूप से आंतरिक जांच दलों के माध्यम से नियमित ऑडिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आचार्य ने सवाल उठाया कि जब सरकार का वित्त विभाग नियमित जांच की बात कर रहा है, तो निदेशालय स्तर पर इस महत्वपूर्ण अनुभाग को समाप्त करने की कोशिशें क्यों की जा रही हैं?
संघ की प्रमुख मांगें:
जांच दलों का गठन: निदेशालय, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO), और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालयों में उपलब्ध लेखा संवर्ग के अधिकारियों व कर्मचारियों के विशेष जांच दल बनाए जाएं।
प्रभावी ऑडिट: प्रदेश की शालाओं और कार्यालयों के वित्तीय अभिलेखों की गहनता से जांच की जाए।
आक्षेप निस्तारण अभियान: वर्षों से लंबित चल रहे ऑडिट आक्षेपों (Audit Objections) के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
मंत्रालयिक कर्मचारियों की भागीदारी: जांच कार्यों में मंत्रालयिक कर्मचारियों को भी शामिल कर कार्य को गति दी जाए।
आगामी रणनीति
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि ऑडिट आईसीपी अनुभाग को बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया गया और जांच दलों का गठन नहीं हुआ, तो संगठन राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होगा। कर्मचारी नेताओं का मानना है कि पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए आंतरिक अंकेक्षण एक अनिवार्य प्रक्रिया है।
