नाबार्ड के सहयोग से बकरी पालन प्रशिक्षण का दूसरा बैच शुरू

नाबार्ड के सहयोग से बकरी पालन प्रशिक्षण का दूसरा बैच शुरू
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quicjZaps 15 sept 2025
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महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की नई पहल

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बीकानेर, 12 मार्च । ग्रामीण महिलाओं और लघु किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान (SGJSS) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नाबार्ड (NABARD) के सहयोग से संस्थान ने ‘आजीविका और उद्यम विकास कार्यक्रम’ (LEDP) के तहत बकरी पालन प्रशिक्षण के दूसरे बैच का विधिवत शुभारंभ किया।

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कम निवेश, अधिक मुनाफ़ा: ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
कार्यक्रम का उद्घाटन विंध्याचल सिंह ने नाबार्ड के जिला विकास निदेशक रमेश तांबिया, एलडीएम लक्ष्मण राम और अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में किया। उद्घाटन संबोधन में विंध्याचल सिंह ने कहा कि बकरी पालन एक ऐसा सस्टेनेबल व्यवसाय है जिसमें निवेश कम है, लेकिन यह छोटे किसानों और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है।

संस्थानों का साझा सहयोग
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक संस्थानों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है:

नाबार्ड (NABARD): जिला विकास निदेशक रमेश तांबिया ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक पशुपालन को ‘माइक्रो-एंटरप्राइज’ में बदलना है ताकि ग्रामीण परिवारों का जीवन स्तर सुधरे।

बैंकों का समर्थन: राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन साहू और एलडीएम लक्ष्मण राम ने प्रशिक्षुओं को भरोसा दिलाया कि बकरी पालन यूनिट स्थापित करने के लिए बैंक आसान ऋण और आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
संस्थान के सचिव धर्मपाल बिश्नोई ने बताया कि प्रशिक्षण केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें प्रतिभागियों को निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। उन्नत नस्ल का चयन और आवास प्रबंधन। संतुलित आहार, पोषण और टीकाकरण। बीमारियों से बचाव और प्रजनन के आधुनिक तरीके। बकरी उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग और उद्यम प्रबंधन।

समावेशी विकास का लक्ष्य
श्री गुरु जम्भेश्वर सेवा संस्थान पिछले लंबे समय से महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ आजीविका के लिए सक्रिय है। इस दूसरे बैच के माध्यम से संगठन का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में आय के नए स्रोत पैदा करना और समावेशी विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूती प्रदान करना है। कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं और स्थानीय किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

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