Stock Market शेयर बाजार क्या होगा डरे-सहमे बाजार का! 5 कारण जो तय करेंगे दिशा

शेयर बाजार क्या होगा डरे-सहमे बाजार का
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026

मुंबई , 2 मार्च। पिछले कई महीनों से शेयर बाजार आए दिन गिरावट के रिकॉर्ड बना रहा है। बीते शुक्रवार 28 फरवरी को सेंसेक्स 1414 प्वाइंट जबकि निफ्टी 420 प्वाइंट की गिरावट पर बंद हुए। ऐसे में निवेशकों के मन में इस हफ्ते बाजार को लेकर अजीब-सा डर है। आखिर वो कौन-से कारण होंगे, जो इस हफ्ते बाजार की दिशा और दशा तय करेंगे।

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1- अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी
इस हफ्ते भी निवेशकों की निगाहें अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी पर रहेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जबसे रेसिप्रोकल (जैसे को तैसा) टैरिफ लगाने की बात कही है, तब से बाजार में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। ट्रम्प ने कहा था कि कनाडा और मैक्सिको से आने वाले सामानों पर 25% टैरिफ 4 मार्च से लागू होंगे। साथ ही चीन से आने वाले सामानों पर एडिशनल 10% ड्यूटी लगाई जाएगी।

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2- मैक्रोइकोनॉमिक्स डेटा
मैक्रोइकॉनोमिक डेटा सांख्यिकीय जानकारी है जो किसी अर्थव्यवस्था के समग्र प्रदर्शन और व्यवहार को दर्शाती है । इनमें सांख्यिकीय एजेंसियों द्वारा उत्पादित संकेतक शामिल हैं, जैसे कि जीडीपी, मुद्रास्फीति और रोजगार, साथ ही इन संकेतकों से प्राप्त सूचकांक और पूर्वानुमान भी शामिल हैं।

3- फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल का भाषण
इस हफ्ते फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ब्याज दर में कटौती के अलावा ग्रोथ और जॉब्स नंबर्स को लेकर अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा अमेरिका के बेरोजगारी आंकड़ों पर भी शेयर बाजार की नजरें रहेंगी। इन्हीं के आधार पर शेयर बाजार रिएक्ट कर सकता है।

4- विदेशी-घरेलू संस्थागत निवेशक
FII ने पिछले हफ्ते कैश सेगमेंट में 22,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेचे, जबकि घरेलू निवेशकों ने 22,252 करोड़ रुपए के शेयर खरीद काफी हद तक इसकी भरपाई की कोशिश की। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से बिकवाली कर रहे हैं, जिसका दबाव भी शेयर मार्केट पर नजर आ रहा है। इस हफ्ते भी FII एक्टिविटीज पर बाजार की नजरें रहेंगी।

5- ECB की मॉनिटरी पॉलिसी
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी में 6 मार्च को होने वाले फैसलों पर भी बाजार रिएक्ट करेगा। माना जा रहा है कि बैंक ग्रोथ पर फोकस करते हुए ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प के 25% टैरिफ लगाने के बाद यूरो क्षेत्र में मंदी का संकट गहरा सकता है।

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