‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन की बड़ी जीत- राजस्थान में कानून बनने तक खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण रोक, मंत्री के आश्वासन के बाद महापड़ाव स्थगित

'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन की बड़ी जीत
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बीकानेर, 12 फ़रवरी । मरुधरा के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए बीकानेर की धरा पर पिछले 11 दिनों से चल रहा ऐतिहासिक संघर्ष गुरुवार देर रात अपनी पहली बड़ी जीत के साथ संपन्न हुआ। राज्य सरकार की ओर से मंत्री के.के. विश्नोई विशेष पत्र लेकर बीकानेर पहुंचे और घोषणा की कि राजस्थान में जब तक सशक्त कानून नहीं बन जाता, तब तक खेजड़ी का एक भी वृक्ष नहीं काटा जाएगा। इस घोषणा के साथ ही कड़ाके की ठंड में जारी महापड़ाव को आधिकारिक रूप से स्थगित कर दिया गया है।

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देर रात तक चले इस घटनाक्रम में आंदोलन स्थल पर उत्साह का माहौल देखा गया। मंत्री के आगमन से पूर्व मंच से ‘नानी बाई को मायरो’ के मंगल गीतों के माध्यम से सुखद संदेश की कामना की जा रही थी। जैसे ही मंत्री पत्र लेकर पहुंचे, आंदोलनकारियों ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसी विधानसभा सत्र में खेजड़ी संरक्षण हेतु कड़े नियम लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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सर्कुलर जारी: अब नहीं चलेगी कुल्हाड़ी

आंदोलन के संयोजक राम गोपाल बिश्नोई ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने खेजड़ी के संबंध में एक आधिकारिक सर्कुलर जारी कर दिया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “यह आप सबके त्याग और 11 दिनों के कठिन संघर्ष की जीत है। अब पूरे राज्य में खेजड़ी की कटाई पर प्रभावी रोक रहेगी।” बिश्नोई ने भविष्य में भी पर्यावरण की रक्षा के लिए समाज को संगठित रहने का आह्वान किया।

संघर्ष के 11 दिन: जब झुकना पड़ा सत्ता को

उल्लेखनीय है कि बीकानेर के कलेक्ट्रेट परिसर के पास विश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा यह महापड़ाव पिछले 11 दिनों से निरंतर जारी था। आंदोलनकारी मांग कर रहे थे कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के नाम पर काटे जा रहे खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए सरकार ‘ट्री एक्ट’ जैसा सख्त कानून लाए। मुख्यमंत्री से हुई वार्ता और गुरुवार रात मंत्री के.के. विश्नोई के बीकानेर पहुंचने के बाद इस गतिरोध का अंत हुआ।

खेजड़ी को लेकर यह पत्र शासन सचिव डॉ. जोगाराम की ओर से जारी किया गया है।

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